Bihar IPS transfer: बिहार के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक अजीब सी हलचल है। राज्य के दो कद्दावर आईपीएस अधिकारी अब केंद्र की राह पकड़ चुके हैं, जिससे सूबे के पुलिस महकमे में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। यह महज स्थानांतरण नहीं, बल्कि राज्य सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर एक गहन मंथन का संकेत भी है।
Bihar IPS transfer: बिहार से दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों का केंद्र में तबादला, पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की आशंका
Bihar IPS transfer: केंद्र में प्रतिनियुक्ति के लिए तैयार दो कड़क अधिकारी
बिहार कैडर के दो अनुभवी आईपीएस अधिकारी, दलजीत सिंह और राजीव मिश्रा, जल्द ही केंद्र सरकार के अधीन अपनी सेवाएं देंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 2007 बैच के कड़क मिजाज अधिकारी और सीआईडी आईजी दलजीत सिंह को सीमा सुरक्षा बल (BSF) में डीआईजी के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। वहीं, पटना के पूर्व सीनियर एसपी और वर्तमान डीआईजी राजीव मिश्रा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में अपनी नई पारी का आगाज करेंगे। इन दोनों अधिकारियों के केंद्र में प्रतिनियुक्त होने से बिहार पुलिस के प्रशासनिक ढांचे में निश्चित रूप से एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
राज्य के राजनीतिक हलकों में इस बात पर भी चर्चा तेज है कि क्या नीतीश कुमार के ‘सुशासन’ के दावों के बावजूद बिहार में वरिष्ठ अधिकारियों के लिए काम करने का माहौल संतोषजनक नहीं है, जिसके कारण वे केंद्र की ओर रुख कर रहे हैं। वर्तमान में लगभग 16 से 17 आईपीएस अधिकारी पहले से ही देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें केंद्र में प्रतिनियुक्त हैं, और करीब एक दर्जन अन्य अधिकारी जैसे आशीष भारती, राकेश राठी और जितेंद्र कुमार भी इस सूची में शामिल होने की कतार में हैं। यह स्थिति इस सवाल को जन्म देती है कि क्या बिहार में कार्य करने के दौरान अधिकारियों को किसी प्रकार की कठिनाई या दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जो उन्हें राज्य के बजाय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में सेवा देने के लिए प्रेरित कर रहा है।
यह प्रवृत्ति केवल इन दो अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार पुलिस के भीतर एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा बन रही है। अधिकारियों का लगातार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की ओर बढ़ना राज्य के लिए एक चुनौती पेश करता है।
अधिकारियों के पलायन से उठते सवाल
इन अधिकारियों के केंद्र में जाने के लिए राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अंतिम प्रशासनिक प्रक्रिया है। जानकारी के अनुसार, जहां विनय कुमार जैसे अधिकारियों को जल्द ही एनओसी मिल गई, वहीं राजीव मिश्रा जैसे अधिकारियों की वापसी और पुनः नियुक्ति को लेकर पुलिस महकमे में काफी बहस और चर्चाएं रही हैं। दलजीत सिंह की कार्यशैली, जो फाइलों की बारीकी से जांच करने और कठोर निर्णय लेने के लिए जानी जाती है, ने भी विभाग के भीतर एक विशिष्ट प्रभाव छोड़ा है। अधिकारियों का यह निरंतर पलायन राज्य सरकार की कार्यशैली पर सीधे तौर पर कई गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

