



Bihar Kabaddi World Cup: बिहार विधानसभा के प्रश्नकाल में आज खेल के मैदान से उठी सियासी आंधी ने सबको हैरान कर दिया। यह सिर्फ एक खेल आयोजन का मसला नहीं, बल्कि सरकार की निर्णय प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे गंभीर सवालों की गूंज थी।
Bihar Kabaddi World Cup: बिहार विधानसभा में गरमाया कबड्डी विश्व कप का मुद्दा, सरकार पर उठे गंभीर सवाल
Bihar Kabaddi World Cup पर क्यों मचा बवाल?
भाजपा विधायक ने बिहार में होने वाले महिला कबड्डी विश्व कप के आयोजन को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने सीधे खेल मंत्री श्रेयसी सिंह पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि आखिर क्यों इतने बड़े आयोजन का निर्णय रातों-रात बदल दिया गया। यह सिर्फ एक खेल आयोजन की बात नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर बरती गई घोर लापरवाही और मनमानी का भी स्पष्ट संकेत था, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जिसने राज्य की खेलीय राजनीति को गरमा दिया। विधायक के तेवर तीखे थे और उन्होंने साफ कहा कि जब इस खेल आयोजन को लेकर सारी तैयारियां हो चुकी थीं, वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी थी और खेल विभाग ने टेंडर भी जारी कर दिया था, तो फिर अंतिम समय में इसे रद्द करने का क्या औचित्य था?
यह सवाल सीधे तौर पर सरकार की मंशा और उसकी कार्यप्रणाली पर उंगली उठाता है। विधायक ने इस पर विस्तृत जवाब मांगा, जिसमें खेल मंत्री से स्पष्टीकरण की उम्मीद की गई। उनका तर्क था कि इस तरह के फैसले न केवल खिलाड़ियों के मनोबल को तोड़ते हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बल्कि राज्य की छवि को भी धूमिल करते हैं।
सरकार की सफाई और विपक्ष का हमला
खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने अपने जवाब में विपक्ष के आरोपों को खारिज करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि टेंडर को रद्द करने का निर्णय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही लिया गया है। हालांकि, विधायक इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर सब कुछ नियमों के तहत हुआ था, तो पहले इतनी तैयारियां क्यों की गईं और फिर अचानक क्यों सब कुछ रोक दिया गया? यह सवाल बिहार के खेल क्षेत्र में चल रही आंतरिक खेलीय राजनीति की ओर भी इशारा करता है, जहां निर्णयों में पारदर्शिता की कमी अक्सर देखने को मिलती है।
विधायक ने इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग की ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक त्रुटियों से बचा जा सके। यह मुद्दा विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा का विषय बन गया है, जो सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है।
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भविष्य की संभावनाएं और चुनौती
महिला कबड्डी विश्व कप जैसे बड़े आयोजन का रद्द होना बिहार के खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों के लिए निराशाजनक है। सरकार के लिए यह एक चुनौती है कि वह इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करे और भविष्य में ऐसे आयोजनों को लेकर एक सुदृढ़ और पारदर्शी नीति बनाए। खेल मंत्री पर सवाल उठना और प्रशासनिक निर्णयों पर संदेह पैदा होना, राज्य में खेल विकास की गति को धीमा कर सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस राजनीतिक दबाव का सामना कैसे करती है और क्या इस मुद्दे पर कोई और खुलासा होता है।


