

Bihar Land Records: कभी-कभी कागजों पर लिखी चंद पंक्तियाँ, समाज में बड़ी बहस छेड़ देती हैं। बिहार के राजस्व विभाग में भी कुछ ऐसा ही घटित हुआ, जहाँ एक नाम को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई थी। अब उस पर से पर्दा उठ गया है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि भूमिहार-ब्राह्मण का नाम सरकारी दस्तावेजों से नहीं हटाया जाएगा, जिससे वर्षों से चली आ रही एक संशय की स्थिति का पटाक्षेप हो गया है।
Bihar Land Records: बिहार के भूमि रिकॉर्ड में बरकरार रहेगा भूमिहार-ब्राह्मण का नाम, डिप्टी सीएम का बड़ा आदेश
Bihar Land Records: सरकारी दस्तावेजों में नाम हटाने की चर्चा पर विराम
बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े सरकारी दस्तावेजों में ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ का नाम नहीं हटाया जाएगा। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है। उनके निर्देश के बाद, इस मुद्दे पर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है, और यह सुनिश्चित हो गया है कि जातिगत नाम से कोई भी छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह फैसला उन चर्चाओं के बीच आया है जिसमें यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि राजस्व दस्तावेजों में दर्ज कुछ विशिष्ट जातिगत नामों को हटाया जा सकता है। इस फैसले ने भूमि से संबंधित रिकॉर्ड्स में ऐतिहासिक रूप से दर्ज जातिगत पहचान को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने इस संबंध में अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी समुदाय के नाम के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व विभाग के दस्तावेजों में दर्ज नामों को यथावत रखा जाए। उनका यह बयान राज्य में एक निश्चित वर्ग की जातिगत पहचान को लेकर उठ रही चिंताओं को शांत करने वाला है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यह मुद्दा पिछले कुछ समय से चर्चा में था, जहाँ विभिन्न वर्गों द्वारा यह मांग की जा रही थी कि उनके नाम और पहचान को सरकारी रिकॉर्ड्स में सम्मानपूर्वक बनाए रखा जाए। इस निर्णय से भूमि रिकॉर्ड्स में दर्ज विवरणों की प्रमाणिकता और लोगों की जातिगत पहचान के प्रति सरकार की संवेदनशीलता पर भी मुहर लगती है।
राजस्व विभाग का स्पष्टीकरण और आगे की राह
इस आदेश के बाद, राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्तर पर नाम हटाने या बदलने का कोई प्रयास न हो। इस कदम से राज्य में भूमि से संबंधित विवादों को कम करने और लोगों के मन में विश्वास बहाल करने में मदद मिल सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह निर्णय बिहार सरकार की नीति का भी एक हिस्सा माना जा सकता है, जो राज्य में विभिन्न समुदायों की भावनाओं का सम्मान करने और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उपमुख्यमंत्री के इस स्पष्ट निर्देश के बाद अब इस विषय पर कोई भ्रम की स्थिति नहीं है।

