Bihar Land Records: बिहार में जमीनी विवादों की फाइलें अक्सर धूल फांटती नजर आती थीं, लेकिन अब सरकार ने इन पर एक निर्णायक चोट की है। बरसों से चली आ रही एक प्रणाली को विराम देते हुए, एक ऐसा रास्ता खोला गया है जिससे आम जन की सुनवाई तेजी से हो सकेगी।
बिहार लैंड रिकॉर्ड्स: जनसंवाद आवेदनों को मिलेगी प्राथमिकता
बिहार में भूमि संबंधी मामलों के निपटारे में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ‘पहले आओ-पहले पाओ’ (FIFO) का दशकों पुराना नियम फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय से उन आवेदनों को प्राथमिकता मिलेगी जो सीधे जनसंवाद कार्यक्रमों से जुड़े हैं, जिससे मामलों का त्वरित निपटारा संभव हो सकेगा। यह कदम जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और गति लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 31 मार्च तक ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के नियम को स्थगित रखने का निर्देश जारी किया है। इस दौरान, केवल उन्हीं आवेदनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो विभिन्न जनसंवाद कार्यक्रमों, यथा मुख्यमंत्री जनसंवाद, जनता के दरबार में मुख्यमंत्री, या अन्य उच्च-स्तरीय संवाद मंचों के माध्यम से विभाग तक पहुंचे हैं। इन आवेदनों को अब फास्ट ट्रैक पर निपटाया जाएगा ताकि जनता को जल्द से जल्द राहत मिल सके।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में भूमि विवादों की संख्या लगातार बढ़ रही थी और आम लोगों को अपने मामलों के निपटारे में अत्यधिक समय लग रहा था। ‘पहले आओ-पहले पाओ’ प्रणाली में कई बार ऐसे महत्वपूर्ण आवेदन भी देरी का शिकार हो जाते थे जिनकी सुनवाई तुरंत होनी आवश्यक थी। सरकार का मानना है कि यह नई व्यवस्था जन-केंद्रित शासन को बढ़ावा देगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
क्यों उठाया गया यह कदम?
इस नियम बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों की शिकायतें और आवेदन, विशेषकर जो सीधे सरकार तक पहुंच रहे हैं, उन्हें त्वरित समाधान मिल सके। कई बार ऐसा देखा गया है कि फाइलें नीचे के स्तर पर अटकी रह जाती हैं, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ता है। नई व्यवस्था से न केवल प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा, बल्कि भूमि संबंधी मामलों में लंबितता को कम करने में भी मदद मिलेगी। राज्य सरकार उम्मीद कर रही है कि इससे भूमि विवादों में कमी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया पर भी बोझ कम होगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यह निर्णय बिहार के भूमि प्रबंधन तंत्र में एक नई दिशा का सूचक है, जहां अब लोक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब देखना यह होगा कि यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और कितने लोगों को इसका सीधा लाभ मिल पाता है।




