back to top
⮜ शहर चुनें
जनवरी, 5, 2026

Bihar Land Records: बिहार में जमीन विवादों पर बड़ा फैसला, ‘पहले आओ-पहले पाओ’ नियम अब खत्म

spot_img
spot_img
- Advertisement - Advertisement

Bihar Land Records: बिहार में जमीनी विवादों की फाइलें अक्सर धूल फांटती नजर आती थीं, लेकिन अब सरकार ने इन पर एक निर्णायक चोट की है। बरसों से चली आ रही एक प्रणाली को विराम देते हुए, एक ऐसा रास्ता खोला गया है जिससे आम जन की सुनवाई तेजी से हो सकेगी।

- Advertisement -

बिहार लैंड रिकॉर्ड्स: जनसंवाद आवेदनों को मिलेगी प्राथमिकता

बिहार में भूमि संबंधी मामलों के निपटारे में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ‘पहले आओ-पहले पाओ’ (FIFO) का दशकों पुराना नियम फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय से उन आवेदनों को प्राथमिकता मिलेगी जो सीधे जनसंवाद कार्यक्रमों से जुड़े हैं, जिससे मामलों का त्वरित निपटारा संभव हो सकेगा। यह कदम जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और गति लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 31 मार्च तक ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के नियम को स्थगित रखने का निर्देश जारी किया है। इस दौरान, केवल उन्हीं आवेदनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो विभिन्न जनसंवाद कार्यक्रमों, यथा मुख्यमंत्री जनसंवाद, जनता के दरबार में मुख्यमंत्री, या अन्य उच्च-स्तरीय संवाद मंचों के माध्यम से विभाग तक पहुंचे हैं। इन आवेदनों को अब फास्ट ट्रैक पर निपटाया जाएगा ताकि जनता को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Darbhanga Train Accident: दरभंगा-सीतामढ़ी के बीच अहमदाबाद-रक्सौल एक्सप्रेस से काटकर वृद्ध की मौत

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में भूमि विवादों की संख्या लगातार बढ़ रही थी और आम लोगों को अपने मामलों के निपटारे में अत्यधिक समय लग रहा था। ‘पहले आओ-पहले पाओ’ प्रणाली में कई बार ऐसे महत्वपूर्ण आवेदन भी देरी का शिकार हो जाते थे जिनकी सुनवाई तुरंत होनी आवश्यक थी। सरकार का मानना है कि यह नई व्यवस्था जन-केंद्रित शासन को बढ़ावा देगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

क्यों उठाया गया यह कदम?

इस नियम बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों की शिकायतें और आवेदन, विशेषकर जो सीधे सरकार तक पहुंच रहे हैं, उन्हें त्वरित समाधान मिल सके। कई बार ऐसा देखा गया है कि फाइलें नीचे के स्तर पर अटकी रह जाती हैं, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ता है। नई व्यवस्था से न केवल प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा, बल्कि भूमि संबंधी मामलों में लंबितता को कम करने में भी मदद मिलेगी। राज्य सरकार उम्मीद कर रही है कि इससे भूमि विवादों में कमी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया पर भी बोझ कम होगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

यह निर्णय बिहार के भूमि प्रबंधन तंत्र में एक नई दिशा का सूचक है, जहां अब लोक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब देखना यह होगा कि यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और कितने लोगों को इसका सीधा लाभ मिल पाता है।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

परमहंस योगानन्द जयंती 2026: आत्म-साक्षात्कार के दिव्य पथ प्रदर्शक

Paramahansa Yogananda Jayanti: एक दिव्य संत, आत्म-साक्षात्कार के मार्गदर्शक परमहंस योगानन्दजी का जीवन ईश्वर-साक्षात्कार,...

CUET UG 2026: आवेदन में न करें ये गलतियां, वरना रद्द हो जाएगा फॉर्म!

CUET UG 2026: देश की प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश का सपना संजोए लाखों छात्रों...

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ ने ‘Box Office Collection’ में मचाया कोहराम, 31वें दिन की कमाई जानकर उड़ जाएंगे होश!

Box Office Collection: 'धुरंधर' का बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तूफान आया है कि बड़े-बड़े...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें