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फ़रवरी, 27, 2026
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Bihar Land Records: लापता अभिलेखों पर सरकार का बड़ा बयान, विशेष अभियान से होगी खोज

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Bihar Land Records: बिहार में जमीन के दस्तावेज गायब होना कोई नई बात नहीं, यह सालों से चली आ रही एक जटिल समस्या का रूप ले चुका है। जब भूमि के कागजात ही न मिलें, तो समझो आधार ही हिल गया। अब सरकार ने इस समस्या पर बड़ा बयान दिया है।

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बिहार लैंड रिकॉर्ड्स: लापता अभिलेखों पर सरकार का बड़ा बयान, विशेष अभियान से होगी खोज

बिहार लैंड रिकॉर्ड्स: 5% खतियानी जमीन का रहस्य

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सदन को एक महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 45 प्रतिशत भूमि खतियानी है, जो कि ऐतिहासिक रूप से दर्ज है, लेकिन चिंताजनक बात यह है कि लगभग 5 प्रतिशत जमीनों के अभिलेख और दस्तावेज़ गायब हो चुके हैं। इस बड़ी समस्या पर सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे गुमशुदा रिकॉर्ड्स को खोजने के लिए एक विशेष तंत्र (मैकेनिज्म) तैयार किया गया है। साथ ही, पूरे राज्य में भूमि सर्वेक्षण बिहार अभियान को तेज कर दिया गया है। यह अभियान उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जिनकी पुश्तैनी जमीन के कागजात लापता हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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उपमुख्यमंत्री सिन्हा के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार में भूमि अभिलेखों के रख-रखाव में कुछ गंभीर खामियां रही हैं। 5 प्रतिशत खतियानी जमीन के अभिलेखों का गायब होना कोई सामान्य बात नहीं है और यह कई दशकों से चली आ रही लापरवाही का परिणाम हो सकता है। इन गायब हुए दस्तावेजों के कारण हजारों भूमि विवाद सामने आते हैं, जिससे न केवल कानूनी प्रक्रियाएं जटिल होती हैं, बल्कि आम जनता को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार का यह कदम इन जटिलताओं को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

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अभिलेखों की खोज और सर्वेक्षण अभियान

सरकार ने स्पष्ट किया है कि गायब हुए भूमि अभिलेखों को फिर से खोजने और उन्हें व्यवस्थित करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके तहत आधुनिक तकनीक और अनुभवी टीमों का उपयोग किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक भूखंड के मालिक को उसके वैध दस्तावेज मिल सकें। पूरे बिहार में चल रहा भूमि सर्वेक्षण बिहार अभियान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य सिर्फ नए रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि पुराने और गायब हो चुके रिकॉर्ड्स को भी खोजना और उन्हें डिजिटल प्रारूप में सुरक्षित करना है। यह भविष्य में भूमि संबंधी धोखाधड़ी और विवादों को रोकने में भी सहायक होगा।

यह घोषणा उन सभी नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है जो अपनी जमीन के गायब दस्तावेजों को लेकर चिंतित हैं। सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को न्याय मिल पाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो और सभी काम पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से किए जाएं। यह अभियान बिहार में भूमि सुधारों की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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