Bihar Land Registry: जमीन के दस्तावेज जैसे कागज़ों पर धूल जम जाती है, लेकिन जब बात काले धन की हो तो उसकी परतें इतनी गहरी होती हैं कि उन्हें हटाना नामुमकिन सा लगता है। बिहार में जमीन की खरीद-फरोख्त में कुछ ऐसा ही बड़ा खेल सामने आया है, जहां इनकम टैक्स विभाग की पैनी नज़रें अब 57 सब रजिस्ट्रार पर टिक गई हैं। उन्हें नोटिस भेजा गया है, क्योंकि आशंका है कि बड़े पैमाने पर काला धन जमीन में खपाया जा रहा है। विशेष रूप से उत्तर बिहार में, जहाँ लगभग 95 प्रतिशत जमीन की रजिस्ट्री कैश में हो रही है, यह स्थिति और भी गंभीर बन चुकी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह एक ऐसा मामला है जो राज्य में संपत्ति के लेन-देन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठा रहा है।
Bihar Land Registry: नगद लेन-देन का बढ़ता ग्राफ और शक के घेरे में रजिस्ट्रार
आयकर विभाग ने बिहार के 57 सब रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर एक बड़े घोटाले की ओर इशारा किया है। विभाग को आशंका है कि इन अधिकारियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर काला धन जमीन की खरीद-बिक्री में खपाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, विशेष रूप से उत्तर बिहार के कई जिलों में जमीन की लगभग 95 प्रतिशत रजिस्ट्री नगद में की जा रही है, जो अपने आप में एक चौंकाने वाला आंकड़ा है। इतनी बड़ी संख्या में नगद लेन-देन से यह साफ संकेत मिलता है कि यह केवल सामान्य खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि इसके पीछे कुछ और बड़ा मकसद है। अक्सर ऐसे मामलों में बेनामी संपत्ति बनाने की कोशिशें होती हैं, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान होता है और अर्थव्यवस्था में काले धन का बोलबाला बढ़ता है।
विभागीय जांच में सामने आया है कि ये सभी सब रजिस्ट्रार ऐसे मामलों से जुड़े हैं जहाँ भूमि पंजीकरण में बड़ी मात्रा में नगद भुगतान हुआ है। आयकर विभाग अब इन लेन-देनों के पीछे की वास्तविक मंशा और धन के स्रोत की जांच कर रहा है। इन नोटिसों का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई राज्य में भूमि राजस्व विभाग के कामकाज पर भी सवाल खड़े करती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
काले धन का खेल और विभाग की कार्रवाई
आयकर विभाग की इस कार्रवाई से उन लोगों में हड़कंप मच गया है जो जमीन में काला धन खपाने का धंधा कर रहे थे। विभाग को यह भी संदेह है कि कई अधिकारी इस खेल में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं। इस मामले में आगामी दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है। बिहार में भूमि से जुड़े मामले हमेशा संवेदनशील रहे हैं, और इस तरह के आरोप राज्य की छवि के लिए ठीक नहीं हैं। सरकार को इस दिशा में कड़े कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों पर लगाम लगाई जा सके। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की मांग है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पूरा प्रकरण सिर्फ एक नोटिस का मामला नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार और बेईमानी की एक बड़ी कहानी का पर्दाफाश हो सकता है।


