



जमीन सिर्फ एक टुकड़ा नहीं, वो किसानों के अरमानों का आकाश है और बिहार के भविष्य का आधार भी। इसी आधार को मजबूत करने के लिए चल रहे Bihar Land Survey: उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि यह सर्वेक्षण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आम लोगों की समस्याओं का स्थायी समाधान है, जिसकी अंतिम तिथि 2027 तय की गई है।
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने पटना स्थित विभागीय कार्यालय में सर्वेक्षण कार्यों की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को साफ तौर पर कहा कि भूमि संबंधी विवादों को जड़ से खत्म करना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि गलत रिपोर्टिंग, अनावश्यक देरी या कार्य में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
2027 तक बिहार लैंड सर्वे पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने बिहार लैंड सर्वे को 2027 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य भूमि संबंधी सभी विवादों का निपटारा कर एक स्पष्ट और पारदर्शी भू-अभिलेख प्रणाली स्थापित करना है। उपमुख्यमंत्री ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की समय-सीमा पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल कागजी कार्यवाही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक सद्भाव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने जोर दिया कि सर्वेक्षण में कोई गलती न हो, इसके लिए आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता से सीधे संवाद करें और उनकी शंकाओं का समाधान करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि हर जमीन मालिक को उसके हक का पूरा अधिकार मिले। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
जमीनी विवादों को खत्म करने की चुनौती
बिहार में वर्षों से लंबित जमीन विवाद एक बड़ी समस्या रहे हैं, जो अक्सर सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों का कारण बनते हैं। नए सर्वेक्षण से इन विवादों को स्थायी रूप से हल करने की उम्मीद है। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भूमि सुधार के इस महायज्ञ में पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाएं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी गरीब या वंचित व्यक्ति अपने भूमि अधिकार से वंचित न रहे।
उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जाएगी और समय-समय पर इसकी प्रगति की रिपोर्ट भी ली जाएगी। पारदर्शिता और जवाबदेही इस पूरे अभियान की रीढ़ होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



