
Bihar Librarian Recruitment: बिहार के स्कूलों में पुस्तकालयाध्यक्षों की बहाली पर मंडराया संकट, जैसे किसी किताब से आखिरी पन्ना गायब हो गया हो। लंबे इंतजार के बाद भी उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है।
Bihar Librarian Recruitment: नियुक्ति प्रक्रिया क्यों हुई ठप?
मिली जानकारी के अनुसार बिहार के सरकारी स्कूलों में पुस्तकालयाध्यक्षों के खाली पदों पर नियुक्ति का रास्ता फिलहाल थम गया है। बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस और ऐसे ही अन्य डिग्रीधारकों को इससे तगड़ा झटका लगा है। अब बिहार बोर्ड द्वारा पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाएगा, जिससे यह पूरी प्रक्रिया अनिश्चित काल के लिए टल गई है।
इससे पहले शिक्षा विभाग ने बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) को इस संबंध में दिशानिर्देश भी जारी किए थे, लेकिन अब नए सिरे से पदों का सृजन होने के बाद ही आगे की कार्यवाही संभव हो पाएगी। यह निर्णय उन हजारों युवाओं के लिए निराशाजनक है, जो इस मौके का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
दरअसल, विभाग ने जिलों से उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालयाध्यक्षों की रिक्तियां मांगी थीं। विधानसभा चुनाव 2025 से पहले शिक्षा विभाग को जिलों से लगभग 4500 पदों की जानकारी मिली थी। यह रिक्तियां वर्ष 2010 में सृजित पुस्तकालयाध्यक्ष के पदों के अनुसार भेजी गई थीं। उस समय राज्य में छह हजार उच्च-उच्चतर माध्यमिक विद्यालय थे। वर्तमान में इन स्कूलों की संख्या बढ़कर 9360 हो गई है।
अब नए सिरे से यह तय किया जाएगा कि किन स्कूलों में पुस्तकालय हैं और वहां कितने पुस्तकालयाध्यक्षों के पद सृजित किए जाने चाहिए। इस कारण नियुक्ति में देरी होना तय है। एक बार पदों का नया सृजन हो जाने के बाद ही शिक्षा विभाग बिहार बोर्ड को पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा आयोजित करने के लिए फिर से मार्गदर्शन देगा। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लगने की संभावना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
14 साल बाद फिर फंसा पेंच: पिछली नियुक्तियां और वर्तमान स्थिति
स्कूलों में पहली बार पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए वर्ष 2008 में नियमावली बनी थी। इसके तहत, संविदा के आधार पर 2596 पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया 2010-11 में पूरी की गई थी। उस दौरान 2100 पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति नियोजित शिक्षकों की तर्ज पर की गई थी। वर्तमान में विभिन्न उच्च माध्यमिक स्कूलों में 1696 पुस्तकालयाध्यक्ष कार्यरत हैं। पुराने पुस्तकालयाध्यक्ष भी सक्षमता परीक्षा के आधार पर नियमित राज्यकर्मी बन रहे हैं।
बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस और मास्टर ऑफ लाइब्रेरी साइंस की डिग्री हासिल करने वाले पुस्तकालय विज्ञान के छात्र लगातार सरकार से नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनकी उम्मीदें थी कि जल्द ही उन्हें नौकरी मिलेगी, लेकिन अब उन्हें और इंतजार करना होगा। यह उनके भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
पिछले साल बनी शिक्षक नियुक्ति नियमावली की तर्ज पर ही पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति नियमावली भी बनाई गई है। इनके लिए हाईस्कूल शिक्षकों के समकक्ष वेतनमान का प्रावधान है। नियुक्ति के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा प्रतियोगिता परीक्षा लेने का भी प्रावधान है। इसमें 100 अंकों के बहुवैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएंगे और गलत उत्तर के लिए कोई अंक नहीं काटे जाएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ये नए नियम राज्यकर्मी की तरह अवकाश और अन्य सुविधाओं का भी प्रावधान करते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि बिहार में पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति का मार्ग अभी लंबा और चुनौतियों भरा है। सरकार को इन पदों के महत्व को समझते हुए जल्द से जल्द समाधान निकालना होगा ताकि राज्य के स्कूलों को योग्य पुस्तकालयाध्यक्ष मिल सकें और पुस्तकालय विज्ञान के छात्र अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हो सकें।







