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मार्च, 2, 2026
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Bihar Liquor Ban: चिराग पासवान ने उठाई समीक्षा की मांग, क्या बदलेगी शराबबंदी की तस्वीर?

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Bihar Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है, जहां सियासी गलियारों में इसकी समीक्षा की मांग जोर पकड़ रही है। यह महज कानून नहीं, बल्कि एक दशक से अधिक समय से राज्य की सामाजिक और आर्थिक धरातल को हिला देने वाला एक संवेदनशील मुद्दा है।

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बिहार में Bihar Liquor Ban पर सियासी घमासान

बिहार में पिछले एक दशक से लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने पटना में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान साफ कहा कि शराबबंदी कानून की समीक्षा समय की मांग है। उन्होंने मौजूदा कानून को पूरी तरह विफल बताया और कहा कि इसका खामियाजा राज्य के गरीब और आम लोग भुगत रहे हैं।

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चिराग पासवान का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में शराबबंदी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अवैध शराब का धंधा फल-फूल रहा है, और जहरीली शराब से होने वाली मौतें एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपनी जिद छोड़कर इस कानून की जमीनी हकीकत का सामना करना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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पासवान ने तर्क दिया कि कानून अपनी जगह सही हो सकता है, लेकिन अगर इसे लागू करने में विफलता है, तो इसका पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि शराबबंदी के बावजूद राज्य में शराब आसानी से उपलब्ध है, जिससे पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग अब केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर से भी इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। यह कानून राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है, जिससे राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस शराबबंदी कानून का मकसद तो अच्छा था, लेकिन क्रियान्वयन में यह पूरी तरह नाकाम रहा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

कानून के सकारात्मक पहलू और चुनौतियां

चिराग पासवान ने कहा कि शराबबंदी ने राज्य में संगठित अपराध को बढ़ावा दिया है। पुलिस का अधिकांश ध्यान शराब पकड़ने में लगा रहता है, जिससे अन्य अपराधों पर नियंत्रण कमजोर पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि कानून को व्यावहारिक बनाना चाहिए ताकि इसका सकारात्मक परिणाम सामने आ सके, न कि केवल कागजों पर यह लागू रहे।

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे समाज के सभी वर्गों, विशेषज्ञों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक व्यापक चर्चा आयोजित करें ताकि शराबबंदी के भविष्य पर एक ठोस निर्णय लिया जा सके। यह राज्य के हित में है कि एक ऐसा रास्ता निकाला जाए जो कानून के मूल उद्देश्य को पूरा करे और साथ ही इसके नकारात्मक प्रभावों को भी कम करे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह मुद्दा बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

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