

बिहार की धरती पर सियासी शराबबंदी का रंग गहराता जा रहा है, और इस बार होली के बहाने आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया है। Bihar Liquor Ban: जिस राज्य में शराबबंदी है, वहां होली के मौके पर 200 ट्रक शराब कैसे पहुंच गई, इस सवाल ने सत्ता के गलियारों से लेकर आम जनता तक में भूचाल ला दिया है।
बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सियासत एक बार फिर उफान पर है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह के सनसनीखेज दावों और सत्तापक्ष की तीखी प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को राजनीतिक, प्रशासनिक और नैतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। होली के दौरान कथित तौर पर 200 ट्रक शराब के बिहार में घुसने की बात ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और इन सवालों के जवाब तलाशने में आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सुनील सिंह ने सिर्फ 200 ट्रक का दावा ही नहीं किया, बल्कि यह भी कहा कि इस खेल में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब तस्करों से हर ट्रक के लिए 10 से 15 लाख रुपये तक की वसूली की गई, जो सरकारी खजाने में जाने के बजाय सीधे जेबों में जा रही है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि यह राशि 200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
Bihar Liquor Ban पर फिर गरमाई सियासत
राजद नेता के इन गंभीर आरोपों पर सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने सुनील सिंह को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके पास सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए, सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया, यह भी आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भाजपा के नेताओं ने भी सुनील सिंह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष सिर्फ आरोप लगाकर राज्य सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि सरकार शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, इन दावों और पलटवारों के बीच, राज्य में अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लगाने की चुनौती लगातार बनी हुई है।
सनसनीखेज दावों पर पलटवार और सरकार की सफाई
इस पूरे प्रकरण ने बिहार पुलिस और उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर इतनी बड़ी मात्रा में शराब राज्य में प्रवेश कर रही थी, तो खुफिया तंत्र और चेक पोस्ट पर तैनात अधिकारी क्या कर रहे थे? यह गंभीर चूक है या मिलीभगत, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। शराबबंदी को सफल बनाने के लिए सिर्फ कानून बनाना ही काफी नहीं, बल्कि उसका ईमानदारी से क्रियान्वयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
बिहार में शराबबंदी की घोषणा के बाद से ही इस कानून को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं। कभी जहरीली शराब से हुई मौतें, तो कभी शराब की होम डिलीवरी की खबरें, हमेशा सुर्खियों में रही हैं। ऐसे में सुनील सिंह के ये दावे एक बार फिर साबित करते हैं कि कानून अपनी जगह है, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अवैध शराब का धंधा फल-फूल रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
शराबबंदी की जमीनी हकीकत: सवाल और चुनौतियां
बिहार में शराबबंदी को लेकर हो रही इस बयानबाजी से यह साफ है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर विषय है। सरकार को इन दावों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। केवल इसी से जनता का विश्वास बहाल हो पाएगा और शराबबंदी का मूल उद्देश्य पूरा हो सकेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


