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जनवरी, 14, 2026

बिहार राजनीति: मंत्री दिलीप जायसवाल ने रोहिणी आचार्य को दी तीखी नसीहत, कहा- लालू-राबड़ी से मांगें न्याय

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Bihar Politics: सियासत के अखाड़े में निजी मामले भी कभी-कभी अखाड़े का हिस्सा बन जाते हैं, और जब बात बिहार की हो तो हर बयान एक नई बहस छेड़ देता है।

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बिहार राजनीति: मंत्री दिलीप जायसवाल ने रोहिणी आचार्य को दी तीखी नसीहत, कहा- लालू-राबड़ी से मांगें न्याय

बिहार राजनीति: क्यों गरमाया रोहिणी आचार्य का ‘न्याय’ विवाद?

बिहार में राजनीतिक बयानबाजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में, बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री दिलीप जायसवाल ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। शनिवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर रोहिणी आचार्य को किसी भी तरह का न्याय चाहिए तो उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बजाय अपने माता-पिता, लालू यादव और राबड़ी देवी से संपर्क साधना चाहिए। मंत्री के इस बयान को लालू परिवार के अंदरूनी मसलों में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है।

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जायसवाल ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी भी व्यक्ति के निजी मामलों में दखल नहीं देते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब रोहिणी आचार्य कुछ निजी मुद्दों को लेकर चर्चा में हैं, हालांकि उनकी तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि वे किस संदर्भ में न्याय की मांग कर रही हैं। मंत्री के इस कटाक्ष ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार की राजनीति में व्यक्तिगत हमले और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला कितनी गहराई तक पसरा हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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यह भी पढ़ें:  Bihar Budget Session 2026: बिहार विधानसभा का पहला पूर्ण बजट सत्र, नई सरकार के लिए अग्निपरीक्षा

यह घटनाक्रम बिहार की सियासी तपिश को और बढ़ा सकता है, खासकर तब जब विधानसभा चुनाव नजदीक हों। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान न केवल व्यक्तिगत छवि को प्रभावित करते हैं, बल्कि संबंधित दलों के बीच भी दूरियां बढ़ाने का काम करते हैं।

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निजी मामलों में मुख्यमंत्री का दखल नहीं: जायसवाल

दिलीप जायसवाल ने साफ किया कि नीतीश कुमार हमेशा सार्वजनिक हित और राज्य के विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री का काम राज्य की जनता के लिए सुशासन सुनिश्चित करना है, न कि किसी के निजी झगड़ों में हस्तक्षेप करना।” मंत्री के इस बयान ने सत्ताधारी गठबंधन के भीतर एकजुटता का संदेश देने का प्रयास भी किया है, यह बताते हुए कि सरकार बेवजह के विवादों से दूर रहना चाहती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

रोहिणी आचार्य और उनके न्याय की मांग को लेकर अभी तक लालू परिवार या राजद की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान के बाद राजद और लालू परिवार इस पर क्या रुख अपनाते हैं। यह घटनाक्रम आगामी दिनों में बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय खोल सकता है, जहां व्यक्तिगत और राजनीतिक सीमाएं एक बार फिर धुंधली होती नजर आ रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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