
Bihar MNREGA: जिस योजना से लाखों ग्रामीण परिवारों के चूल्हे जलते थे, जिस पर करोड़ों मजदूरों की रोजी-रोटी टिकी थी, आज वही योजना बिहार में खुद वित्तीय संकट के गहरे दलदल में फंस गई है। पिछले दो महीनों से मजदूरी का भुगतान ठप होने से श्रमिकों के सामने भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है।
Bihar MNREGA संकट: बिहार में मनरेगा श्रमिकों का बुरा हाल, दो महीने से नहीं मिली मजदूरी
Bihar MNREGA: बिहार में गहराता मनरेगा संकट
बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा इस समय गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही है। राज्य के लगभग 20 लाख श्रमिकों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है क्योंकि उन्हें पिछले दो महीनों से मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण रोजगार की सख्त आवश्यकता है।
मनरेगा, जो ग्रामीण भारत में सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम है, वित्तीय प्रबंधन की चुनौतियों का सामना कर रहा है। श्रमिकों को उनकी मेहनत का पैसा न मिल पाना, न केवल उनके परिवारों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिक आमतौर पर समाज के सबसे कमजोर वर्ग से आते हैं और उनकी दैनिक जरूरतों के लिए इस मजदूरी पर ही निर्भर रहते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह सिर्फ श्रमिकों की परेशानी का मामला नहीं है, बल्कि यह राज्य की ग्रामीण विकास योजनाओं पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। केंद्रीय फंड की कमी या राज्य स्तर पर वित्तीय कुप्रबंधन, जो भी कारण हो, इसका सीधा खामियाजा उन गरीब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है जो इस योजना के सहारे जी रहे थे।
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वित्तीय संकट की जड़ें और समाधान की राह
राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार से समय पर फंड न मिलने के कारण यह भुगतान संकट उत्पन्न हुआ है। हालांकि, कुछ विश्लेषक राज्य सरकार के भीतर ही योजना के धन के आवंटन और उपयोग में देरी को भी एक कारक मानते हैं। इस गतिरोध ने न केवल श्रमिकों को निराश किया है, बल्कि मनरेगा के उद्देश्यों पर भी संदेह पैदा कर दिया है – जो कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा प्रदान करना है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। राज्य सरकार को केंद्र के साथ समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द लंबित भुगतान जारी करवाने के लिए कदम उठाने चाहिए। दीर्घकालिक समाधान के तौर पर, मनरेगा के लिए एक सुदृढ़ और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन प्रणाली विकसित करना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न न हों। श्रमिकों की मेहनत का सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


