Bihar Monsoon Session: राजधानी पटना में चल रहे बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र का दूसरा दिन मंगलवार कई बड़े फैसलों के लिए महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कुल 10 से अधिक महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए। इनमें बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026, बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026, बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक-2026, बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक-2026, निबंधन अधिनियम (बिहार संशोधन) विधेयक-2026, भारतीय स्टाम्प (बिहार संशोधन) विधेयक-2026, बिहार नगर विकास विधेयक-2026, बिहार व्यापार सुगमता विधेयक-2026 और बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक-2026 जैसे प्रमुख प्रस्ताव शामिल हैं। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाना है, जिसका सीधा असर राज्य के आम नागरिकों पर पड़ेगा। सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि प्रशासन, नगर विकास, कर व्यवस्था और कारोबार को आसान बनाने से जुड़े प्रस्ताव सदन के सामने रखे।
ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी पर अब होगी सख्त कार्रवाई
मॉनसून सत्र में सबसे अधिक चर्चा बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक-2026 को लेकर हो रही है। इस प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद मोबाइल फोन, कंप्यूटर या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में जुआ या ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े एप्लिकेशन रखना भी अपराध माना जाएगा। सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलते पकड़े जाने पर बिना वारंट तलाशी और गिरफ्तारी का प्रावधान भी इस विधेयक में शामिल है।






नए कानून के तहत सजा और जुर्माने के विस्तृत प्रावधान रखे गए हैं। सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलते हुए दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की जेल या तीन हजार से दस हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों सजाएं हो सकती हैं। वहीं, यदि कोई सार्वजनिक, व्यावसायिक स्थल या ऑनलाइन मंच के जरिए जुआ संचालित करता है, तो पहली बार दोषी पाए जाने पर छह महीने से तीन वर्ष तक की कैद और पचास हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा ऐसा अपराध करने पर दो से पांच वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। यह कानून डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से बढ़ रही ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तैयार किया गया है।

दाखिल-खारिज शुल्क तय, भूमि विवाद होंगे कम
भूमि से जुड़े मामलों में सरकार ने एक महत्वपूर्ण बदलाव दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) प्रक्रिया को लेकर प्रस्तावित किया है। नए संशोधन के अनुसार, अब दाखिल-खारिज की प्रत्येक याचिका, अपील और पुनरीक्षण आवेदन पर 200 रुपये का निर्धारित शुल्क देना अनिवार्य होगा। इससे पहले ऐसे मामलों में केवल न्यायालय शुल्क स्टाम्प लगाने की व्यवस्था थी और कोई निश्चित शुल्क तय नहीं था। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि भविष्य में विशेष या सामान्य आदेश के जरिए इस शुल्क में आवश्यकतानुसार बदलाव किया जा सकेगा।
भूमि प्रशासन से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव निबंधन अधिनियम में संशोधन का है। इसके तहत किसी जमीन के उपयोग, प्रकृति या श्रेणी में बदलाव से संबंधित दस्तावेजों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों में कमी आएगी। साथ ही, बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक-2026 भी सदन में पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य पुराने कानून की जगह नई व्यवस्था लागू करना है।
शहरों के सुनियोजित विकास के लिए बनेगा नया प्राधिकरण
शहरी विकास के क्षेत्र में भी बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार नगर विकास विधेयक-2026 के तहत राज्य में बिहार नगर विकास प्राधिकरण गठित करने का प्रस्ताव है। इस प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों का योजनाबद्ध तरीके से विस्तार करना, नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाना और ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करना है। सरकार का मानना है कि यह पहल भविष्य की शहरी जरूरतों के अनुसार विकास योजनाओं को गति देगी और शहरों को अधिक व्यवस्थित बनाएगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह नया जुआ कानून केंद्र सरकार की उस पहल के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें पुराने सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 के स्थान पर राज्यों को नए कानून बनाने की सलाह दी गई थी।
इन विधेयकों के माध्यम से बिहार सरकार राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार लाने का प्रयास कर रही है। आने वाले दिनों में इन विधेयकों पर सदन में विस्तृत चर्चा और मतदान होने की संभावना है, जिसके बाद ये कानून का रूप ले लेंगे और राज्य के विभिन्न क्षेत्रों पर इनका गहरा प्रभाव पड़ेगा।









