Bihar Nuclear Power Plant: बिहार के भविष्य को नई ऊर्जा से रोशन करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है, जहां अब परमाणु शक्ति से जगमग होने की तैयारी है। राज्य में परमाणु बिजली घर बनाने के लिए प्रारंभिक सर्वे का काम पूरा हो चुका है, जो सूबे के ऊर्जा परिदृश्य में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है। बांका, नवादा और सीवान जिलों में परमाणु बिजली घर स्थापित करने की संभावनाओं को तलाशने के लिए पिछले साल शुरू किया गया यह सर्वे अब अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है। राज्य बिजली कंपनी ने इस विस्तृत रिपोर्ट का अध्ययन भी शुरू कर दिया है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो केंद्रीय सहयोग से वित्तीय वर्ष 2027-28 से इन परियोजनाओं पर निर्माण कार्य आरंभ होने की प्रबल संभावना है।
Bihar Nuclear Power Plant: बिहार में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं का खाका तैयार
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, 24 जून 2025 को पटना में पूर्वी भारत के राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों का एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की थी। उन्होंने बताया था कि देश में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमएल) तकनीक का उपयोग करके परमाणु बिजली घर स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। राज्य सरकार की विशेष मांग पर, बिहार में भी इस अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित परमाणु बिजली घर बनाने का निर्णय लिया गया है।
केंद्र सरकार के निर्देश पर ही राज्य बिजली कंपनी ने बांका, नवादा और सीवान में परमाणु बिजली घर की स्थापना की संभावनाओं का पता लगाने के लिए एक विस्तृत सर्वे शुरू करवाया था। भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम (एनपीसीआईएल) और राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) की संयुक्त टीम ने इस सर्वे को अंजाम दिया और इसकी रिपोर्ट कंपनी को सौंप दी है। सर्वे के दौरान परमाणु बिजली घर के लिए आवश्यक पानी की उपलब्धता, भूमि की स्थिति, भूकंपीय जोन में स्थान, आबादी का घनत्व और कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की गहनता से जांच की गई है। इस परमाणु ऊर्जा परियोजना से राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पानी की उपलब्धता: एक बड़ी चुनौती
सर्वे रिपोर्ट में परमाणु बिजली घर के लिए पानी की उपलब्धता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि नवादा और बांका को परमाणु बिजली घर के लिए उपयुक्त स्थान माना गया है, लेकिन इन दोनों जिलों में पानी की संभावित कमी को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। सर्वे एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि परमाणु बिजली घर के संयंत्रों को ठंडा करने और बिजली उत्पादन प्रक्रियाओं के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। पानी का उपयोग मुख्य रूप से रिएक्टर से निकलने वाली गर्मी को नियंत्रित करने और टरबाइन चलाने के लिए भाप बनाने में किया जाता है।
जितनी अधिक बिजली उत्पादन क्षमता होगी, उतनी ही अधिक गर्मी उत्पन्न होगी और उसी अनुपात में पानी की आवश्यकता भी बढ़ जाएगी। आंकड़ों के अनुसार, एक मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए हर घंटे लगभग 500 से 700 गैलन (लगभग 1,892 से 2,649 लीटर) पानी की जरूरत होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस बीच, सीवान में पानी की प्रचुर उपलब्धता तो है, लेकिन यह जिला भूकंप के दृष्टिकोण से संवेदनशील माना जाता है। केंद्र सरकार की सलाह पर ही परमाणु बिजली घर के निर्माण को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बिहार बिजली कंपनी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सीवान के भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए, नवादा और बांका में परमाणु बिजली घर की स्थापना के लिए आवश्यक अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यह परमाणु ऊर्जा परियोजना राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

