
Bihar Old Age Home: पटना के गुलजारबाग स्थित सहारा ओल्ड एज होम के बुजुर्गों की दुर्दशा सामने आई है। बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (BSLSA) की टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि यहां रहने वाले सीनियर सिटीजंस को न तो समुचित कानूनी सहायता मिल रही है, न ही पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ। यह हाल तब है जब समाज कल्याण विभाग इसकी निगरानी करता है।

BSLSA की टीम ने 4 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे सहारा ओल्ड एज होम का दौरा किया। इस दौरान टीम में मेंबर सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी, रजिस्ट्रार और असिस्टेंट रजिस्ट्रार शामिल थे। उन्होंने ओल्ड एज होम के पूरे कामकाज का जायजा लिया। कुल 100 सीनियर सिटीजंस (39 पुरुष, 61 महिला) से बातचीत की गई ताकि उनके रखरखाव और स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन किया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस बातचीत में कई गंभीर अनियमितताएं और परेशानियां सामने आईं।

आधार कार्ड और कल्याणकारी योजनाओं का हाल
- आधार कार्ड की समस्या:
- 100 में से केवल 57 लोगों के पास आधार कार्ड थे।
- बाकी लोगों ने बताया कि मोबाइल फोन/सिम कार्ड न होने के कारण वे आधार कार्ड नहीं बनवा पा रहे हैं, जो रजिस्ट्रेशन और OTP सत्यापन के लिए आवश्यक है।
- आधार कार्ड न होने से वृद्धावस्था पेंशन, आयुष्मान भारत कार्ड और PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) जैसी योजनाओं तक उनकी पहुंच प्रभावित हो रही है।
- सलाह दी गई कि संबंधित विभाग 15 दिनों के भीतर आधार कैंप लगाकर सभी को कार्ड मुहैया कराए।
- कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन:
- केवल 25 लोगों को वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी, जबकि 75 वंचित थे।
- स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आयुष्मान कार्ड भी केवल 25 लोगों के पास थे, 75 लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा था।
- PDS का लाभ 44 लोगों को मिल रहा था, वहीं 66 लोग इससे अछूते थे।
- समाज कल्याण विभाग को अन्य विभागों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि सभी बुजुर्गों को 15 दिनों के भीतर इन योजनाओं का समान और पारदर्शी लाभ मिले।
स्वास्थ्य और कानूनी सहायता में लापरवाही
- आहार मानकों का उल्लंघन:
- दैनिक आहार चार्ट, निवासियों से बातचीत और रसोई सुविधाओं के निरीक्षण से पता चला कि समाज कल्याण विभाग द्वारा निर्धारित आहार चार्ट का पालन नहीं किया जा रहा था। इस अनियमितता का कोई उचित कारण भी नहीं बताया गया।
- कानूनी सहायता की अनुपस्थिति:
- निरीक्षण के दौरान लीगल एड क्लिनिक खाली पाया गया, पैनल लॉयर गैर-मौजूद थे, और कोई पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) भी उपलब्ध नहीं था।
- बताया गया कि PLV केवल विशेष कार्यक्रमों के दौरान ही उपस्थित रहते हैं, जिससे निरंतर कानूनी सहायता का अभाव बना हुआ है।
- डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को निर्देश दिया गया कि लीगल एड क्लिनिक में एक सक्रिय लीगल एड एडवोकेट नियुक्त किया जाए।
Bihar Old Age Home में बदहाल व्यवस्था
- चिकित्सा सुविधाओं की कमी:
- निवासियों ने बताया कि डॉक्टर लगभग 15 दिनों में केवल एक बार आते हैं। नियमित और उचित चिकित्सा उपचार नहीं दिया जा रहा है।
- दी जाने वाली दवाएं अक्सर अपर्याप्त या अनुचित होती हैं। ओल्ड एज होम में कोई स्थायी डॉक्टर नहीं है।
- बुजुर्गों की देखभाल के लिए केवल 3 ANM स्टाफ नियुक्त हैं, जिन पर वरिष्ठ चिकित्सा व्यवसायी का उचित पर्यवेक्षण नहीं है।
- सलाह दी गई कि डॉक्टर सप्ताह में कम से कम तीन बार आएं।
- रहने की स्थिति और स्वच्छता:
- कुछ निवासियों ने शिकायत की कि उनसे सफाई और रखरखाव का काम लिया जा रहा है, जो उनकी उम्र और शारीरिक स्थिति के अनुसार उचित नहीं है। इस प्रथा को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया गया।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। बातचीत से यह स्पष्ट हुआ कि Bihar Old Age Home में कल्याणकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं, कानूनी मदद और बुनियादी ढांचे के क्रियान्वयन में कई गंभीर खामियां हैं। यहां रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को तत्काल ध्यान देने और मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।








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