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फ़रवरी, 18, 2026
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बिहार आउटसोर्सिंग कर्मचारी: विधान सभा में गरमाया मुद्दा, क्या मिलेगी ‘ठेके’ के दलदल से मुक्ति?

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बिहार आउटसोर्सिंग कर्मचारी: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में आज प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही इन कर्मचारियों की दुर्दशा पर सदन में तीखी बहस छिड़ गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के विधायकों ने एक सुर में सरकार से इनके वेतन, कार्य अवधि और सेवा शर्तों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। यह मुद्दा प्रदेश में लंबे समय से लंबित है, और हर सत्र में इसकी गूंज सुनाई देती है।

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कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि सचिवालय से लेकर विभिन्न जिलों के सरकारी कार्यालयों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों का जमकर शोषण हो रहा है। उन्हें न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन दिया जाता है, कार्य अवधि तय नहीं होती और कई बार तो महीनों तक वेतन का भुगतान नहीं होता। यह स्थिति उनके परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर रही है। विधायकों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग के नाम पर इन कर्मचारियों के श्रमिक अधिकार का हनन किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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बिहार आउटसोर्सिंग कर्मचारी: वेतन और सेवा शर्तों पर सरकार घेरे में

एक विधायक ने सदन में बताया कि किस तरह से इन कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से हटा दिया जाता है, और उनके पास अपनी बात रखने का कोई मंच नहीं होता। उन्होंने कहा कि सरकार को इन कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक ठोस नीति बनानी चाहिए, ताकि उनके श्रमिक अधिकार सुनिश्चित किए जा सकें।

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विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि सरकार आउटसोर्सिंग नीति की समीक्षा करे और एक ऐसी व्यवस्था लागू करे जिससे इन कर्मचारियों को भी नियमित कर्मचारियों के समान लाभ मिल सकें। उन्होंने कहा कि जब काम वही है, तो वेतन और सेवा शर्तों में इतना बड़ा अंतर क्यों? यह सीधे तौर पर समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है।

आउटसोर्सिंग नीति पर पुनर्विचार की मांग

सरकार की ओर से जवाब देते हुए संबंधित मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार इन मुद्दों को लेकर गंभीर है और जल्द ही इस दिशा में उचित कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिन एजेंसियों के माध्यम से ये कर्मचारी नियुक्त किए जाते हैं, उनकी कार्यप्रणाली पर भी नजर रखी जाएगी और अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, विधायकों ने मंत्री के जवाब को अपर्याप्त बताते हुए मांग की कि सरकार एक निश्चित समय-सीमा के भीतर इस समस्या का समाधान निकाले। उनका कहना था कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा, ठोस कार्रवाई की जरूरत है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

यह ध्यान देने योग्य है कि बिहार में हजारों की संख्या में आउटसोर्सिंग कर्मचारी सरकारी विभागों में कार्यरत हैं, और उनकी जीविका इन्हीं अस्थाई नौकरियों पर टिकी है। सदन में उठी यह आवाज उनकी उम्मीदों को कितनी उड़ान दे पाती है, यह देखना दिलचस्प होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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