



Panchayat Raj: बिहार की सियासत में जब जनता के प्रतिनिधि ही सवालों के घेरे में आ जाएं, तो लोकतंत्र की नींव डगमगाने लगती है। विधानसभा में उठी एक आवाज ने सीधे तौर पर उन लाखों जनप्रतिनिधियों के भविष्य और सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, जो जमीनी स्तर पर सरकार की रीढ़ हैं।
Panchayat Raj: विधानसभा में उठा जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा का मुद्दा
बिहार विधानसभा में पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा और उनके परिवारों के भविष्य को लेकर एक अहम बहस ने तूल पकड़ लिया है। भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने सरकार से सीधा सवाल करते हुए कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत राज के निर्वाचित प्रतिनिधियों की सामान्य मृत्यु पर मिलने वाली सहायता राशि बेहद कम है और इसमें तत्काल वृद्धि होनी चाहिए। यह सिर्फ एक मुआवजा राशि का सवाल नहीं, बल्कि उन जनप्रतिनिधियों के सम्मान और उनके परिवार के प्रति राज्य की जिम्मेदारी का भी सवाल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जीवेश मिश्रा ने सदन में कहा कि जनप्रतिनिधियों की मृत्यु होने पर उनके परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सामान्य मृत्यु की स्थिति में भी सम्मानजनक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के मुखिया, वार्ड सदस्य, पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य जैसे सभी जनप्रतिनिधि 24 घंटे जनता के लिए उपलब्ध रहते हैं। कभी-कभी उन्हें अपनी जान तक गंवानी पड़ती है। ऐसे में सामान्य मृत्यु पर मिलने वाली मामूली मुआवजा राशि उनके बलिदान के आगे नगण्य है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों के परिवारों के लिए भविष्य निधि, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं को लागू करने की भी जोरदार वकालत की।
पंचायत प्रतिनिधियों के लिए पेंशन और बीमा की मांग
विधायक मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि पंचायत प्रतिनिधियों को भी सरकारी कर्मचारियों के समान सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके त्याग और सेवा को देखते हुए यह उनका अधिकार है। विधानसभा में इस मुद्दे पर सदन के सदस्यों ने भी गंभीरता से विचार-विमर्श किया। कई अन्य विधायकों ने भी जीवेश मिश्रा की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक क्षेत्र विशेष का नहीं, बल्कि पूरे राज्य के पंचायत प्रतिनिधियों का ज्वलंत मुद्दा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब देखना यह होगा कि सरकार इस गंभीर विषय पर क्या कदम उठाती है और कब तक पंचायत प्रतिनिधियों की लंबित मांगों को पूरा कर उनके जीवन को सुरक्षित करती है।





