



Bihar Paramedical Education: जीवन के पथ पर ज्ञान की लौ जलाने निकले हजारों छात्रों का भविष्य जब अधर में लटक जाए, तो विधानसभा में सवाल उठना लाजिमी है। बिहार विधानसभा में शुक्रवार को कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब पैरामेडिकल शिक्षा से जुड़ा एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा सदन के केंद्र में आ गया। एएनएम, जीएनएम और फार्मेसी कोर्स में नामांकन कराने वाली हजारों छात्राओं की परीक्षा अब तक नहीं हो पाने को लेकर सरकार से सीधा सवाल किया गया, जिसने पूरे सदन का ध्यान खींचा।
Bihar Paramedical Education: हजारों छात्रों का भविष्य अधर में
यह मामला हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा है, जो राज्य के विभिन्न पैरामेडिकल संस्थानों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन छात्रों ने उम्मीदों के साथ नामांकन कराया था कि वे समय पर अपनी पढ़ाई पूरी कर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे पाएंगे, लेकिन परीक्षाओं में हो रही अनिश्चितता ने उनके सपनों पर ग्रहण लगा दिया है। छात्राओं का एक बड़ा वर्ग इस बात से चिंतित है कि देर से होने वाली छात्रों की परीक्षाएं उनके करियर की योजनाओं को कैसे प्रभावित करेंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
यह सिर्फ एक शैक्षणिक देरी नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का सवाल है। जब प्रदेश के युवा डॉक्टर और नर्स बनने का सपना देख रहे हों, तब उन्हें इस तरह की अनिश्चितता का सामना करना पड़े, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। विधानसभा में इस पर काफी गहमागहमी देखी गई।
सरकार पर उठे गंभीर सवाल और जवाबदेही की मांग
सत्ता पक्ष के विधायकों को भी इस सवाल का सामना करना पड़ा कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षाएं क्यों नहीं हो पा रही हैं। यह मुद्दा सिर्फ छात्रों की शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य से भी जुड़ा है। समय पर प्रशिक्षित पैरामेडिकल कर्मियों की उपलब्धता स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस देरी से न केवल छात्रों का मनोबल टूट रहा है, बल्कि बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र को भी प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी से जूझना पड़ सकता है। सरकार को इस पर शीघ्रता से कोई ठोस कदम उठाना होगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। सदन में यह भी बताया गया कि कई बार छात्रों द्वारा ज्ञापन और प्रदर्शन भी किए गए हैं, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया है। यह बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। यह खबर आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आगे की राह: समाधान की उम्मीद
इस संवेदनशील मुद्दे पर सदन में हुई बहस के बाद अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि वह इस दिशा में क्या कदम उठाती है। छात्रों और उनके अभिभावकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही कोई रास्ता निकालेगी, जिससे उनकी लंबित परीक्षाओं का आयोजन सुनिश्चित हो सके और उनके भविष्य को एक नई दिशा मिल पाए। बिहार सरकार के शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर इस जटिल समस्या का त्वरित समाधान निकालना होगा, ताकि प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



