Bihar Pharmacy Scam: शिक्षा के मंदिर में भ्रष्टाचार का ‘फार्मेसी’ खेल, जहां लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का ताना-बाना बुना जा रहा है। देश के सबसे बड़े शैक्षणिक घोटालों में से एक 5400 करोड़ रुपये के कथित महाघोटाले की आंच अब बिहार तक पहुँच गई है, जिसने राज्य में हड़कंप मचा दिया है।
बिहार फार्मेसी स्कैम: 5400 करोड़ के महाघोटाले में बिहार का नाम, PCI चेयरमैन पर गंभीर आरोप
बिहार फार्मेसी स्कैम: क्या है पूरा मामला?
फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में देश के सबसे प्रतिष्ठित नियामक निकाय, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के चेयरमैन डॉ. मोंटू पटेल पर मानकविहीन और फर्जी फार्मेसी कॉलेजों को धड़ल्ले से मान्यता देने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस घोटाले का अनुमानित दायरा 5400 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। आरोप है कि बिना उचित निरीक्षण और निर्धारित मानकों का पालन किए, डॉ. पटेल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कई ऐसे संस्थानों को मान्यता प्रदान की, जो फार्मेसी की शिक्षा देने के लिए पात्र नहीं थे। यह एक ऐसा कदम है जो न केवल शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करता है, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य को भी अधर में लटका देता है।
इस पूरे प्रकरण में बिहार का नाम सामने आने से राज्य के शैक्षणिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह खुलासा हुआ है कि बिहार में भी कई ऐसे फार्मेसी कॉलेज हैं जिनकी मान्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और जिन पर इस कथित घोटाले का साया मंडरा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच में सामने आया है कि डॉ. मोंटू पटेल ने अपने कार्यकाल के दौरान कई कॉलेजों को मनमाने ढंग से **फर्जी मान्यता** दी थी, जिसमें बिहार के कुछ संस्थान भी शामिल हैं। इन कॉलेजों में न तो पर्याप्त प्रयोगशालाएँ थीं और न ही योग्य शिक्षक, फिर भी उन्हें नियमों को ताक पर रखकर संचालित करने की अनुमति दे दी गई।
जांच के घेरे में बिहार के फार्मेसी कॉलेज
बिहार में फार्मेसी कॉलेजों की संख्या और उनकी गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब 5400 करोड़ रुपये के इस महाघोटाले से जुड़ने के बाद, राज्य के कई संस्थानों पर तलवार लटक रही है। छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल है कि क्या उनकी डिग्री वैध होगी या नहीं। राज्य सरकार और संबंधित शैक्षणिक प्राधिकरणों पर अब इस मामले में सख्त कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।
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इस घोटाले ने भारत में फार्मेसी शिक्षा की नियामक प्रणाली में गहरी खामियों को उजागर किया है। यह दर्शाता है कि कैसे कुछ व्यक्तियों के स्वार्थ के कारण पूरे तंत्र को खोखला किया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भविष्य की चुनौतियां और अपेक्षित कार्रवाई
इस मामले में सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। उन सभी फार्मेसी कॉलेजों की गहन जांच की जा रही है जिन्हें डॉ. मोंटू पटेल के कार्यकाल में मान्यता मिली थी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो न केवल दोषी व्यक्तियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी, बल्कि उन सभी कॉलेजों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है जिन्होंने गलत तरीके से **फर्जी मान्यता** प्राप्त की थी। यह लाखों छात्रों के भविष्य को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा, जिन्हें अब अपने करियर को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे प्रकरण से सबक लेते हुए, भारत में उच्च शिक्षा के नियामक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारों की आवश्यकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




