डिजिटल पुलिसिंग: बिहार पुलिस अब हाई-टेक होने जा रही है! राज्य के सभी 1,382 थानों को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) से जोड़ने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है, जिससे अब अपराध पर लगाम लगाना और भी आसान हो जाएगा।
अपर पुलिस महानिदेशक (एससीआरबी एवं आधुनिकीकरण) ने सरदार पटेल भवन, राज्य पुलिस मुख्यालय में बताया कि बिहार के सभी 1,382 पुलिस थानों को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) से एकीकृत करने की योजना बनाई गई है। यह कदम डिजिटल पुलिसिंग और प्रशासनिक आधुनिकीकरण की दिशा में एक व्यापक प्रयास का हिस्सा है। वर्तमान में 968 पुलिस थाने पहले ही सीसीटीएनएस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।
अपर पुलिस महानिदेशक (एससीआरबी एवं आधुनिकीकरण), बिहार, पटना अजिताभ कुमार द्वारा पुलिस आधुनिकीकरण एवं नागरिक सुविधाओं से संबंधित विभिन्न तकनीकी पहलों की विस्तृत जानकारी साझा की गई।

शेष थानों को अगले 2-3 महीनों के भीतर एकीकृत कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि हार्डवेयर की खरीद पूरी हो चुकी है और पूर्ण पैमाने पर कार्यान्वयन के लिए कर्मियों का प्रशिक्षण भी जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 347 नए पुलिस थाने—जो पहले चौकियां के रूप में कार्य कर रहे थे—को उन्नत किया गया है और अब उन्हें इस नेटवर्क के तहत लाया जा रहा है। सीसीटीएनएस एक केंद्रीय सरकारी पहल है जिसे पुलिसिंग के लिए एक एकीकृत डेटाबेस बनाने, ई-गवर्नेंस प्रणालियों के माध्यम से आपराधिक रिकॉर्ड, केस हिस्ट्री और एनालिटिक्स तक वास्तविक समय पहुंच को सक्षम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
डिजिटल पुलिसिंग की ओर बड़ा कदम: निगरानी और आधुनिकीकरण
अधिकारियों ने बताया कि अब तक 1,212 पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। शेष 176 पुलिस थानों और चौकियों को भी जल्द ही कवर कर लिया जाएगा। एडीजी ने कहा कि इस निगरानी प्रणाली से वरिष्ठ अधिकारी कामकाज की निगरानी कर सकेंगे और दिन-प्रतिदिन के पुलिस अभियानों में जवाबदेही सुनिश्चित होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
AI आधारित पुलिसिंग और नागरिक सेवा पोर्टल
पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रिडिक्टिव पुलिसिंग की ओर भी बदलाव का संकेत दिया है। अधिकारियों ने कहा कि अपराध के पैटर्न का विश्लेषण डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके किया जाएगा ताकि अपराधों का अनुमान लगाया जा सके और उन्हें रोका जा सके। एडीजी ने कहा, “फोकस यह है कि AI और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके प्रिडिक्टिव पुलिसिंग की ओर बढ़ा जाए ताकि अपराध होने से पहले ही उसे कम किया जा सके।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह कदम डिजिटल पुलिसिंग को एक नए स्तर पर ले जाएगा। पढ़िए विस्तार में
बिहार पुलिस का बड़ा कदम: राज्य के सभी थानों में डिजिटल पुलिसिंग, AI पर भी फोकस
डिजिटल पुलिसिंग: बिहार पुलिस अब हाईटेक बनने की राह पर है! राज्य के सभी 1,382 थानों को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) से जोड़ने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस बड़े कदम से पुलिसिंग में पारदर्शिता और दक्षता आएगी, और अपराधियों पर लगाम लगाना और भी आसान होगा।
राज्य पुलिस मुख्यालय के सरदार पटेल भवन में आयोजित एक बैठक में अतिरिक्त महानिदेशक (SCRB और आधुनिकीकरण) ने बताया कि 968 पुलिस थाने पहले ही CCTNS प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। बाकी थानों को अगले 2-3 महीनों के भीतर एकीकृत करने की उम्मीद है। हार्डवेयर की खरीद पूरी हो चुकी है और कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि पूर्ण पैमाने पर डिजिटल पुलिसिंग लागू की जा सके।
CCTNS से जुड़ेंगे सभी थाने: क्या है योजना?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 347 नए पुलिस थाने — जो पहले चौकी के रूप में काम कर रहे थे — उन्हें अपग्रेड किया गया है और अब CCTNS नेटवर्क के तहत लाया जा रहा है। एकीकरण प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण और सिस्टम अपग्रेड शामिल है। CCTNS केंद्र सरकार की एक पहल है जिसे पुलिसिंग के लिए एक एकीकृत डेटाबेस बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो ई-गवर्नेंस सिस्टम के माध्यम से आपराधिक रिकॉर्ड, केस हिस्ट्री और एनालिटिक्स तक वास्तविक समय पहुंच को सक्षम करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
सीसीटीवी निगरानी और AI आधारित पुलिसिंग का लक्ष्य
अधिकारियों ने बताया कि अब तक 1,212 पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। शेष 176 पुलिस थानों और चौकियों को भी जल्द ही कवर किया जाएगा। एडीजी ने कहा कि यह निगरानी प्रणाली वरिष्ठ अधिकारियों को कामकाज की निगरानी करने और दैनिक पुलिस अभियानों में जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद करेगी।
पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पुलिसिंग की ओर बदलाव का भी संकेत दिया है। अधिकारियों ने कहा कि अपराध के पैटर्न का विश्लेषण डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके किया जाएगा ताकि अपराधों का अनुमान लगाया जा सके और उन्हें रोका जा सके। एडीजी ने कहा, “फोकस AI और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके अपराध होने से पहले ही उसे कम करने पर है।” यह AI आधारित पुलिसिंग बिहार को अपराध मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
नागरिकों के लिए ऑनलाइन सुविधाएँ
डिजिटल सुधारों के तहत, नागरिक सेवा पोर्टल का विस्तार किया जा रहा है ताकि निवासी कई पुलिस-संबंधित सेवाओं को ऑनलाइन एक्सेस कर सकें। इनमें एफआईआर कॉपी, लापता व्यक्तियों की जानकारी, अज्ञात शव, वांछित अपराधी, गिरफ्तार व्यक्ति, बरामद संपत्ति का विवरण, किरायेदार सत्यापन और गुमनाम शिकायत प्रस्तुत करना शामिल है। अधिकारियों ने कहा कि इसका उद्देश्य पुलिस थानों में शारीरिक रूप से आने-जाने को कम करना और सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है। एडीजी ने कहा, “लोग अपने घरों से ही इन सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।”
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डिजिटल सुधारों के तहत, सिटीजन सर्विस पोर्टल का विस्तार किया जा रहा है ताकि नागरिक पुलिस से संबंधित कई सेवाओं को ऑनलाइन प्राप्त कर सकें। इनमें एफआईआर की प्रतियां, लापता व्यक्तियों की जानकारी, अज्ञात शव, वांछित अपराधी, गिरफ्तार व्यक्ति, बरामद संपत्ति का विवरण, किरायेदार सत्यापन और गुमनाम शिकायतें प्रस्तुत करना शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि इसका उद्देश्य पुलिस थानों में भौतिक दौरे को कम करना और सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है। एडीजी ने कहा, “लोग अपने घरों से आराम से इन सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे।”
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