Bihar Politics: बिहार की सियासत में खरमास का विराम अब खत्म होने को है, और इसके साथ ही शुरू हो गई है नए ‘खेल’ की बिसात बिछाने की तैयारी, ठीक वैसे ही जैसे शांत समंदर में तूफान से पहले की खामोशी होती है। मकर संक्रांति के बाद अटकलों का बाजार गरम है, हर तरफ राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने की उम्मीद है।
बिहार पॉलिटिक्स: खरमास खत्म, अब होगा ‘बड़ा खेल’! मकर संक्रांति के बाद तेज हुई सियासी अटकलें
बिहार पॉलिटिक्स में खरमास का विराम और नए समीकरण
Bihar Politics: खरमास का महीना धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भले ही शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता हो, लेकिन बिहार की सियासत में यह अक्सर एक ‘राजनीतिक विराम’ का काल होता है। इस दौरान बड़े राजनीतिक उठापटक या घोषणाओं से परहेज किया जाता है, लेकिन इसके खत्म होते ही, विशेषकर मकर संक्रांति के बाद, बड़े सियासी घटनाक्रम की अटकलें परवान चढ़ने लगती हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जब राज्य में राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों और गठबंधनों की खूब चर्चा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
राज्य की राजनीतिक फिजा में एक बार फिर बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के बाद कई महत्वपूर्ण निर्णय और घोषणाएं सामने आ सकती हैं, जो प्रदेश की आगामी राजनीति की दिशा तय करेंगी। नेताओं की अंदरूनी बैठकें और बयानबाजी इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा है। मौजूदा समय में, सभी की निगाहें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पर टिकी हैं, क्योंकि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले यह ‘खेला’ बेहद अहम माना जा रहा है। सियासी हलचल तेज है और हर दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। यह समय राजनीतिक दलों के लिए अपनी ताकत का प्रदर्शन करने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का भी है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस अवधि में कई बड़े चेहरे अपनी पार्टी या गठबंधन बदल सकते हैं, जिससे बिहार की सियासत में एक नया अध्याय शुरू होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मकर संक्रांति के बाद संभावित ‘बड़ा खेल’ और उसकी पृष्ठभूमि
मकर संक्रांति के पर्व के साथ ही बिहार की राजनीति में दशकों से यह परंपरा रही है कि इसके बाद ही बड़े राजनीतिक बदलाव या गठबंधन की घोषणाएं होती हैं। इस बार भी यही उम्मीद की जा रही है कि खरमास के ‘ब्रेक’ के बाद, राजनीतिक मोहरे अपनी-अपनी बिसात बिछाएंगे। जनता भी इन सियासी हलचलों पर पैनी निगाह रखे हुए है, क्योंकि इन घटनाक्रमों का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ना तय है। चाहे वह गठबंधन टूटने की खबरें हों या नए चेहरों के उदय की, बिहार की राजनीति में आने वाला समय बेहद दिलचस्प होने वाला है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



