
बिहार की राजनीति: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद से ही राज्य में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। कयासों का बाजार गर्म है कि आखिर बिहार की सत्ता की कमान अब किसके हाथ में जाएगी।
बिहार की सियासी गलियारों में इन दिनों अटकलों का बाजार तेज है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाल ही में राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद से ही सबकी नजरें आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार अप्रैल माह में अपनी सदस्यता की प्रक्रिया पूरी करने वाले हैं, जिसके बाद बिहार की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
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नीतीश कुमार का अगला कदम और बिहार की राजनीति पर असर
जेडीयू नेता और बिहार सरकार के मंत्री विजय चौधरी के एक बयान ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। विजय चौधरी ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगा। इसके बाद ही राज्य में नई सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सूत्रों के हवाले से खबर है कि नीतीश कुमार 12 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता की शपथ ले सकते हैं। इसके तुरंत बाद वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद बिहार में एक नई सरकार का गठन संभव है।
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मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कौन?
यदि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो बिहार में भाजपा से पहला मुख्यमंत्री चुने जाने की अटकलें जोरों पर हैं। एनडीए गठबंधन के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत है, ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन को सुगम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा की ओर से सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू कर सकता है। नई सरकार के गठन में जातीय समीकरण और गठबंधन की मजबूती को ध्यान में रखना एक बड़ी चुनौती होगी। खरमास की अवधि समाप्त होने के बाद नई सरकार बनने की संभावनाओं पर तेजी से चर्चा चल रही है। नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और अब संसद में अपनी भूमिका निभाने की इच्छा जता चुके हैं।
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