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जनवरी, 16, 2026
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Bihar Politics: मकर संक्रांति की पतंगों में उलझी और सुलझती बिहार पॉलिटिक्स में नए गठबंधन और पुरानी दोस्ती में टूट…नया क्या है!

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Bihar Politics: बिहार की सियासत इन दिनों पतंगों की डोर सी उलझी और सुलझती नजर आ रही है, जहां हर दांव पर एक नया समीकरण जन्म लेता है। मकर संक्रांति का पर्व भले ही बीत गया हो, लेकिन इसके बाद बिहार की राजनीति में गर्माहट कुछ ऐसी छाई है कि हर किसी की नजरें आने वाले दिनों पर टिकी हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। दरअसल, बिहार में मकर संक्रांति के बाद मौसम के साथ-साथ सियासी तापमान भी तेजी से चढ़ने लगा है। यह ऐसा समय होता है जब राजनीतिक दल और उनके नेता पारंपरिक दही-चूड़ा भोज के बहाने एक-दूसरे के करीब आते हैं, मेल-मुलाकात का सिलसिला चलता है और भविष्य की रणनीतियों पर पर्दे के पीछे मंथन होता है।

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Bihar Politics: मकर संक्रांति भोज और सियासी हलचल

हालांकि, इस बार दही-चूड़ा भोज की परंपरा ने जहां नेताओं को एक-दूसरे के करीब आने का मौका दिया, वहीं पिछली Bihar Assembly Elections के बाद बने हालात ने सत्ता और विपक्ष के बीच के फर्क को और भी साफ कर दिया है। सत्ताधारी गठबंधन अपनी उपलब्धियों को गिनाने में जुटा है, तो वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों और फैसलों पर लगातार सवाल उठा रहा है। यह टकराव की स्थिति राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है।

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बिहार की सियासी पिच पर नए दांव-पेच

मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में हर पार्टी अपने पत्ते बड़ी सावधानी से खोल रही है। नए गठबंधन और पुरानी दोस्ती टूटने की अटकलें लगातार लगाई जा रही हैं, लेकिन फिलहाल सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। पिछले Bihar Assembly Elections के अनुभवों से सबक लेते हुए, अब नेता किसी भी छोटे से छोटे मुद्दे को भी भुनाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह भी देखा जा रहा है कि राजनीतिक बयानबाजियां पहले से कहीं अधिक तीखी और सीधा हमलावर हो गई हैं, जिससे राजनीतिक माहौल में गर्माहट साफ महसूस की जा सकती है।

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राजनीति के जानकार मानते हैं कि यह केवल दही-चूड़ा भोज की औपचारिकताओं से कहीं अधिक है। यह आने वाले समय में होने वाली राजनीतिक उठापटक का संकेत है, जहां हर पार्टी अपनी जमीन मजबूत करने और विरोधी को कमजोर करने की फिराक में है। विपक्ष के नेता लगातार सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष विकास कार्यों और अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं की फेहरिस्त गिना रहा है।

देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस खींचतान में जनता के मुद्दे अक्सर पीछे छूट जाते हैं, लेकिन यह बिहार की राजनीति की खासियत रही है कि यहाँ कभी भी समीकरण बदल सकते हैं। आगामी महीनों में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं, जो राज्य के भविष्य की दिशा तय करेंगे।

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