
Bihar Rajya Sabha Election: बिहार की सियासत में शह और मात का खेल अपने चरम पर है, जहां राज्यसभा चुनाव की बिसात पर ऐसी चालें चली जा रही हैं कि बड़े-बड़े सूरमा भी चकरा जाएं। आज का दिन प्रदेश की राजनीति में भारी गहमागहमी लेकर आया, जब राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू हुई। चार सीटों पर तो जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट पर एनडीए और महागठबंधन के बीच ऐसा पेंच फंसा है कि हर एक वोट कीमती हो गया है। इधर, आई पी गुप्ता बोले, वोट देकर निकले IIP सुप्रीमो IP गुप्ता ने कांग्रेस विधायकों के गायब होने पर कहा, इधरे काहे देखते हैं NDA के कई विधायकों का फोन भी नहीं लग रहा। तेजस्वी यादव चौका-छक्का मारेंगे।
मतदान के दौरान जहां एक ओर महागठबंधन खेमे में चिंता की लकीरें खिंची हुई थीं क्योंकि कांग्रेस के तीन विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे थे, वहीं जेडीयू के भी दो विधायकों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। लेकिन इस सियासी ड्रामे में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ की दो विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात कर ली। इस एक मुलाकात ने एनडीए के रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Bihar Rajya Sabha Election में मुलाकातों का दौर और बढ़ती बेचैनी
यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि ये दोनों विधायक जीतन राम मांझी की रिश्तेदार हैं। बाराचट्टी से विधायक ज्योति मांझी उनकी समधन हैं, तो वहीं इमामगंज से विधायक दीपा मांझी उनकी बहू हैं। विधानसभा परिसर में ही वोट डालने से ठीक पहले तेजस्वी यादव के कमरे में हुई इस मुलाकात ने एक बड़े सियासी उलटफेर की अटकलों को हवा दे दी है। इस बैठक के बाद एनडीए खेमे में हलचल तेज हो गई और यह सवाल उठने लगा कि क्या मांझी परिवार में सब कुछ ठीक नहीं है? या यह महागठबंधन की कोई सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है?
हालांकि, यह मुलाकात कुछ ही मिनटों की थी, लेकिन इसके सियासी मायने बहुत गहरे निकाले जा रहे हैं। बिहार की राजनीति को करीब से जानने वाले समझते हैं कि यहां कुछ भी यूं ही नहीं होता। हर कदम के पीछे एक गहरा राजनीतिक संदेश छिपा होता है। इस मुलाकात ने उस पांचवीं सीट के समीकरण को और भी जटिल बना दिया है, जिसके लिए पहले से ही कांटे की टक्कर चल रही थी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
पांचवीं सीट पर फंसा पेंच, क्या है पूरा गणित?
दरअसल, पांचवीं सीट के लिए एनडीए और महागठबंधन, दोनों ही अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। मुकाबला इतना नजदीकी है कि एक-एक विधायक का वोट निर्णायक साबित हो सकता है। ऐसे में जब AIMIM ने राजद उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान किया तो महागठबंधन का पलड़ा थोड़ा भारी लगने लगा था। लेकिन कांग्रेस और जेडीयू के विधायकों की अनुपस्थिति ने खेल को फिर से बराबरी पर ला दिया। इसी बीच… आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मांझी की पार्टी की विधायकों की तेजस्वी से मुलाकात ने एनडीए की नींद उड़ा दी है।
अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि क्या यह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट थी या फिर बंद कमरे में कोई नई सियासी खिचड़ी पकाई गई है। क्या यह एनडीए पर दबाव बनाने की एक कोशिश है या फिर सचमुच कोई बड़ा खेल होने वाला है? इन सवालों का जवाब तो वोटों की गिनती के बाद ही मिलेगा, लेकिन इस एक घटना ने बिहार राज्यसभा चुनाव को बेहद रोमांचक बना दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। फिलहाल, दोनों खेमों में अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की पुरजोर कोशिश जारी है और सबकी निगाहें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं।

