

Bihar Rajya Sabha Election: बिहार की सियासत में हवाएं कब रुख बदल दें, कोई नहीं जानता। अभी राज्यसभा चुनाव की आहट ही है कि गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है, खासकर तब जब एक दिग्गज नेता ने पुराने वादे की याद दिला दी है।
बिहार राज्यसभा चुनाव: मांझी ने याद दिलाया NDA को पुराना वादा, सीट बंटवारे पर गरमाई सियासत
Bihar Rajya Sabha Election: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर अपने पत्ते खोल दिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में उनकी पार्टी को जो प्रतिनिधित्व देने का आश्वासन पहले मिला था, उसे अब पूरा किया जाएगा। मांझी ने साफ किया कि वे किसी तरह की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि NDA के शीर्ष नेतृत्व के फैसले का इंतजार करेंगे। उनके इस सधे हुए बयान ने बिहार NDA में सीट बंटवारे को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जहां हर घटक दल अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाहता है।
बिहार राज्यसभा चुनाव: HAM की उम्मीदें और NDA की चुनौतियां
जीतना राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) को बीते विधानसभा चुनावों के बाद से ही सियासी गलियारों में यह चर्चा थी कि उन्हें गठबंधन में उचित सम्मान मिलेगा। अब जबकि 2026 के राज्यसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, मांझी का यह बयान महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने एक ओर जहां अपनी पार्टी की आकांक्षाओं को सामने रखा है, वहीं दूसरी ओर गठबंधन धर्म का पालन करते हुए फैसले को NDA गठबंधन के पाले में डाल दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और हर पार्टी अपने आधार को मजबूत करने में लगी है।
बिहार में राजनीतिक पार्टियां अक्सर बड़े चुनावों से पहले ही सीटों के गणित में उलझ जाती हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद अब सभी की निगाहें राज्यसभा और फिर विधानसभा चुनावों पर टिकी हैं। मांझी का यह बयान संकेत देता है कि HAM, जो कि NDA का एक महत्वपूर्ण घटक है, अपनी राजनीतिक हैसियत को कम आंकने को तैयार नहीं है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी को पहले यह आश्वासन दिया गया था कि उन्हें राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का मौका दिया जाएगा।
गठबंधन में संतुलन की कवायद
NDA के भीतर सीट बंटवारे का मुद्दा हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है। बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी (रामविलास) और HAM जैसे घटक दलों के बीच सीटों का न्यायोचित वितरण एक चुनौती भरा काम होता है। जीतन राम मांझी का बयान सिर्फ उनकी पार्टी की आवाज नहीं है, बल्कि यह गठबंधन के भीतर अन्य छोटे दलों की महत्वाकांक्षाओं को भी हवा दे सकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व पर यह दबाव होगा कि वह सभी घटक दलों को साथ लेकर चले और हर किसी की उम्मीदों को पूरा करे। बिहार की राजनीति में ऐसे दांव-पेंच आम हैं, जहां हर नेता अपनी पार्टी के हित साधने की कोशिश करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NDA को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी सहयोगी दलों की आवाज सुनी जाए ताकि गठबंधन की एकजुटता बनी रहे। मांझी जैसे अनुभवी नेता की उम्मीदों को नजरअंदाज करना गठबंधन के लिए महंगा पड़ सकता है। आगामी दिनों में इस मुद्दे पर और भी बयानबाजी देखने को मिल सकती है, जिससे बिहार की राजनीति में गर्माहट बनी रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि NDA का केंद्रीय नेतृत्व इस ‘वादे’ को कैसे निभाता है और बिहार में अपने गठबंधन सहयोगियों के बीच संतुलन कैसे साधता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

