
Bihar Rajya Sabha Election: राजनीति के अखाड़े में बिछी बिसात, बिछाई जा रही नई मोहरें। बिहार में राज्यसभा सीटों के लिए शह और मात का खेल अपने चरम पर है, जहां हर दल अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है।
बिहार राज्यसभा चुनाव: NDA में सीटों के बंटवारे पर मंथन
बिहार में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सीट बंटवारे और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर गहन चर्चा चल रही है। गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच इसे लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं। इसी गहमागहमी के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की सक्रियता ने सभी का ध्यान खींचा है। हाल ही में उनकी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हुई लंबी मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। यह मुलाकात NDA Seat Sharing की रणनीति पर भी गंभीर संकेत देती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कयास लगाए जा रहे हैं कि कुशवाहा ने इस मुलाकात में अपनी पार्टी के लिए एक राज्यसभा सीट की मांग रखी है। हालांकि, आरएलएम के नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट थी और इसमें कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। लेकिन, राजनीतिक पंडित इसे केवल शिष्टाचार भेंट मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि आने वाले चुनाव में अपनी प्रासंगिकता और ताकत को सिद्ध करने के लिए कुशवाहा हर संभव प्रयास कर रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
मुख्यमंत्री आवास पर महत्वपूर्ण बैठक
मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस बैठक के बाद से बिहार की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान एनडीए के अन्य घटक दलों जैसे हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से भी सीट समायोजन को लेकर बातचीत हुई है। प्रत्येक सहयोगी दल अपनी दावेदारी को मजबूती से पेश कर रहा है।
माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के बीच सीटों का मुख्य बंटवारा होगा, जबकि छोटे सहयोगियों को भी NDA Seat Sharing के तहत संतुष्ट करने का प्रयास किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों का परिणाम आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भी एक संकेत हो सकता है। इसलिए सभी दल फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं ताकि गठबंधन में कोई दरार न पड़े। यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए का शीर्ष नेतृत्व किस फॉर्मूले पर सहमति बनाता है और कौन-कौन से चेहरे राज्यसभा के लिए चुने जाते हैं।

