

बिहार राज्यसभा चुनाव: बिहार की सियासत इन दिनों गर्म तवे पर रखी रोटी की तरह है, जहाँ हर पल नया दांव खेला जा रहा है। ऐसे में आगामी राज्यसभा चुनाव ने राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज कर दी है।
बिहार राज्यसभा चुनाव: पांचवीं सीट पर फंसा पेंच, NDA और महागठबंधन में कांटे की टक्कर
बिहार राज्यसभा चुनाव: आंकड़ों का खेल और NDA की रणनीति
राज्यसभा की पांच सीटों के लिए बिहार में सियासी बिसात बिछ चुकी है, और दांव पर सिर्फ सीटें नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों का सम्मान भी है। सत्ताधारी NDA खेमे में सीटों को लेकर लगभग तस्वीर साफ है, लेकिन पांचवीं सीट ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मौजूदा विधानसभा में NDA के पास कुल 202 विधायक हैं, जिससे चार सीटों पर उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 40 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। इस लिहाज से NDA आसानी से चार सीटें जीत सकता है, जिसमें 160 विधायक खर्च होंगे।
हालांकि, शेष 42 विधायकों के साथ NDA पांचवीं सीट पर भी अपना दावा मजबूत करने की फिराक में है। इसके लिए उन्हें कुछ अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। वहीं, महागठबंधन, जिसके पास 35 विधायक हैं, को अपनी एक भी सीट निकालने के लिए एआईएमआईएम (AIMIM) के 5 और बीएसपी (BSP) के 1 विधायक के समर्थन की सख्त आवश्यकता होगी। यह सियासी समीकरण उन्हें जीत के करीब ला सकता है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों खेमे अपनी-अपनी रणनीति को कैसे अंजाम देते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। यह चुनाव केवल राज्यसभा की सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की ताकत का भी एक पैमाना साबित होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पांचवीं सीट पर महागठबंधन का गणित और चुनौतियों का पहाड़
महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्हें 5 और विधायकों की जरूरत है। ऐसे में एआईएमआईएम के 5 विधायक और बीएसपी के 1 विधायक का समर्थन उनके लिए संजीवनी का काम कर सकता है। लेकिन क्या ये छोटे दल महागठबंधन के साथ आएंगे, यह बड़ा सवाल है।
दूसरी ओर, NDA अपनी पांचवीं सीट जीतने के लिए छोटे दलों के विधायकों या निर्दलीयों को अपने पाले में लाने की कोशिश करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुकाबला बेहद कांटे का होगा और आखिरी समय तक इसमें कोई भी पासा पलट सकता है। इस पूरे परिदृश्य में सियासी समीकरण और भी जटिल हो सकते हैं, जिससे विधायकों की खरीद-फरोख्त की अटकलें भी तेज हो गई हैं, हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
कुल मिलाकर, बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट पर संग्राम पूरे शबाब पर है। NDA और महागठबंधन दोनों ही अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। आने वाले नतीजे बिहार की राजनीति के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



