

Bihar Rajya Sabha Elections: सियासत का अखाड़ा एक बार फिर गर्म है, जहां विधानसभा की बिसात पर बिछी गोटियां अब दिल्ली की राह तय करेंगी। पांच सीटों का गणित और एक छोटी पार्टी की अहम भूमिका ने इस चुनाव को और भी रोचक बना दिया है, जब बड़े दल भी अपनी-अपनी रणनीति साध रहे हैं।
बिहार राज्यसभा चुनाव: सीटों का गणित और NDA की राह
निर्वाचन आयोग ने 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव की घोषणा कर दी है, जिसके तहत बिहार की पांच महत्वपूर्ण सीटों पर घमासान होना है। विधानसभा में वर्तमान दलगत स्थिति को देखते हुए, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए यह राह अपेक्षाकृत आसान दिख रही है, लेकिन सियासी गलियारों में एक नया मोड़ तब आया है जब एक छोटी पार्टी ने इस मुकाबले को रोमांचक बना दिया है।
मौजूदा सियासी समीकरणों के अनुसार, NDA के पास अपने दम पर अधिकांश सीटें जीतने का संख्याबल है। लेकिन खेल तब पलटता है जब पांचवीं सीट पर बात आती है, जहां हर एक वोट की कीमत बढ़ जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के कुछ विधायकों की भूमिका ‘किंगमेकर’ की हो सकती है, जिससे परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/
छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन इस बार राज्यसभा चुनावों में निर्णायक साबित हो सकता है। यह सिर्फ सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि आगामी लोकसभा चुनावों से पहले विभिन्न दलों की ताकत का भी एक सियासी समीकरण पैमाना है।
पांचवीं सीट पर क्यों है सबकी नजर?
पांचवीं सीट पर मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि यह न सिर्फ दलों के संख्याबल का प्रदर्शन होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि छोटी पार्टियां बड़े राजनीतिक परिदृश्य में कितनी प्रभावी हो सकती हैं। AIMIM के विधायकों का समर्थन जिस भी पाले में जाएगा, उस पाले का पलड़ा भारी होना तय है। राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह चुनाव बिहार में आने वाले समय की राजनीति की दिशा भी तय करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



