



Bihar Rent Agreement: पटना की धरती पर, जहां किराएदारों की तादाद लाखों में है, वहीं कानूनी सुरक्षा का सूरज अभी भी बादलों में छिपा है। अब बिहार सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो इस धुंध को छांटकर पारदर्शिता की राह खोलेगा।
बिहार रेंट एग्रीमेंट: किराएदारों को मिली बड़ी राहत, आधी हुई रजिस्ट्रेशन फीस
राजधानी पटना में दस लाख से अधिक किराएदार निवास करते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि प्रतिवर्ष मात्र पांच हजार रेंट एग्रीमेंट ही पंजीकृत हो पाते हैं। यह स्थिति किराएदारों और मकान मालिकों दोनों के लिए कानूनी अनिश्चितता का माहौल पैदा करती है, जहां विवादों की आशंका बनी रहती है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए, बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सरकार ने रेंट एग्रीमेंट और निबंधित लीज को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इनके पंजीकरण शुल्क में पचास प्रतिशत तक की कटौती करने का ऐलान किया है। यह कदम राज्य में संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में उठाया गया है।
कम शुल्क में बढ़ेगा बिहार रेंट एग्रीमेंट का चलन
इस पहल का मुख्य लक्ष्य आम लोगों के बीच पंजीकृत रेंट एग्रीमेंट के प्रचलन को बढ़ाना है। दरअसल, पंजीकृत एग्रीमेंट न केवल मकान मालिकों को उनके संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि किराएदारों को भी किसी भी प्रकार के शोषण से बचाते हुए कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। यह कदम एक बेहतर संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था की ओर इशारा करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती से न केवल पंजीकरण विभाग का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि किराएदार और मकान मालिक दोनों एक सुरक्षित कानूनी ढांचे के भीतर आ जाएंगे। यह पहल भविष्य में होने वाले विवादों को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कानूनी विवादों से मिलेगी मुक्ति
सरकार के इस फैसले से लाखों किराएदारों को सीधा फायदा मिलेगा, जो अब तक पंजीकरण की उच्च लागत के कारण इसे टालते रहे थे। यह एक ऐसा सुधार है जो बिहार के शहरी जीवन में किराएदारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाएगा। यह दर्शाता है कि सरकार जनहितैषी फैसलों के प्रति गंभीर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


