
Bihar Revenue Officers Strike: गरजते बादल अक्सर बरसते नहीं, पर जब सरकार की तलवार चलती है, तो उसका असर दूर तक जाता है। बिहार में हड़ताली राजस्व अधिकारियों पर अब यही तलवार लटकती दिख रही है।
बिहार में राजस्व विभाग के अधिकारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने अब बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ तौर पर आदेश जारी किया है कि सभी हड़ताली अधिकारी 25 मार्च की शाम 5 बजे तक हर हाल में अपने काम पर लौट आएं, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब आम जनता को भूमि संबंधी कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Bihar Revenue Officers Strike: सरकार का कड़ा रुख और अंतिम चेतावनी
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में सामूहिक अवकाश पर गए अधिकारियों के इस कदम को पूरी तरह से अवैध और जनहित के खिलाफ बताया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की जनता को दी जाने वाली आवश्यक सेवाओं में बाधा उत्पन्न करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। इस सरकारी सख्ती का सीधा असर हड़ताली अधिकारियों पर पड़ना तय है, क्योंकि सरकार ने निलंबन से लेकर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई का संकेत दिया है।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जो भी कर्मचारी निर्धारित समय सीमा तक काम पर नहीं लौटते हैं, उनकी सूची तुरंत तैयार की जाए। इसके बाद इन अधिकारियों के खिलाफ बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के तहत कठोर कदम उठाए जाएंगे। इस पूरे मामले पर सरकार की निगाहें बनी हुई हैं।
सामूहिक अवकाश को अवैध घोषित
राज्य सरकार का कहना है कि राजस्व अधिकारियों की मांगें विचाराधीन हैं और बातचीत के रास्ते हमेशा खुले हैं, लेकिन जनहित को बंधक बनाकर हड़ताल करना उचित नहीं है। भूमि विवादों के निपटारे, दाखिल-खारिज और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में हो रही देरी से ग्रामीण क्षेत्रों में काफी आक्रोश है। ऐसे में सरकार के पास सख्ती बरतने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। सरकार के इस रवैये से यह साफ हो गया है कि वह किसी भी सूरत में हड़तालियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राजस्व संबंधी कार्यों में किसी भी तरह की रुकावट न आए।
जनहित बनाम कर्मचारी हित
राजस्व अधिकारियों का कहना है कि उनकी मांगे जायज हैं और वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि कर्मचारियों को अपनी बात रखने का अधिकार है, पर इससे आम जनता को होने वाली परेशानी की अनदेखी नहीं की जा सकती। अब देखना यह होगा कि सरकार के इस अल्टीमेटम के बाद कितने राजस्व अधिकारी काम पर लौटते हैं और कितने अपनी जिद पर अड़े रहते हैं, क्योंकि 25 मार्च की शाम 5 बजे के बाद बिहार के राजस्व विभाग में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह स्थिति प्रदेश के प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।




