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Bihar Weather: 1967 के बाद सबसे भीषण आंधी-बारिश और ओले ने मचाई तबाही, पढ़िए आधे घंटे की मौसम का बदला मिजाज और तबाही का मंजर

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Bihar Weather: कुदरत जब रौद्र रूप धारण करती है, तो हर हिसाब-किताब धरे का धरा रह जाता है। मंगलवार देर रात बिहार के कई इलाकों में आसमान से ऐसी आफत बरसी कि बरसों पुरानी यादें ताजा हो गईं।

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मंगलवार देर रात करीब साढ़े ग्यारह बजे बिहार के एक बड़े हिस्से में अचानक मौसम ने करवट ली। तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हुई और उसके साथ ही ओलावृष्टि ने पूरे इलाके को तबाह कर दिया। ग्रामीण बताते हैं कि 1967 के बाद इतनी भीषण आंधी और ओलावृष्टि उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखी थी। लगभग आधे घंटे तक चले इस प्राकृतिक प्रकोप ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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Bihar Weather: मौसम का बदला मिजाज और तबाही का मंजर

आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई जगहों पर पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और कच्चे मकानों को भारी नुकसान हुआ। ओलों का आकार काफी बड़ा था, जिससे खेत में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। धान, मक्का और सब्जियों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं, जिससे किसानों की कमर टूट गई है। यह सब आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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स्थानीय निवासियों के अनुसार, अचानक हुए इस बदलाव से किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। रात के अंधेरे में जब तेज हवाएं चलीं और ओले बरसने लगे, तो लोगों में दहशत फैल गई। कई पशुधन भी इस प्राकृतिक आपदा का शिकार हुए हैं। इस गंभीर स्थिति पर आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाई जा रही है।

ओलावृष्टि से जनजीवन अस्त-व्यस्त

बुधवार सुबह होते ही तबाही का मंजर साफ दिखाई दिया। चारों ओर गिरे पेड़ और घरों की टूटी छतें आपदा की कहानी बयां कर रही थीं। लोग अपने घरों और खेतों को हुए नुकसान का जायजा ले रहे थे। ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है और उसे बहाल करने में काफी समय लगने की उम्मीद है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

यह घटना बिहार में बदलते जलवायु पैटर्न की ओर भी इशारा करती है, जहां अब अप्रत्याशित मौसमी घटनाएं आम होती जा रही हैं। सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग को ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए स्थायी समाधान खोजने होंगे, ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

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