
Bihar Skill Development: योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार द्वारा 19 जून, 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य में कौशल विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री के ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान कौशल विकास कार्यक्रमों को भविष्य की औद्योगिक एवं तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्संरचित करने पर विशेष बल दिया गया।
कौशल विकास से मिले हजारों रोजगार के अवसर
नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से कुल 63,115 रोजगार अवसरों का सृजन किया गया है। इसके अतिरिक्त, ‘बिहार रोजगार सेतु पोर्टल’ के जरिए अब तक 68,822 युवाओं को नौकरी मिली है। राज्य के 44 सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों में स्थापित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने 26,740 युवाओं को प्रशिक्षित किया है, जिनमें से 4,600 युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है।




विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह ने कहा, “बिहार की कौशल विकास प्रणाली को भविष्य की औद्योगिक एवं तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि युवाओं को वैश्विक और स्थानीय रोजगार बाजार की वास्तविक मांग के अनुरूप कौशल प्राप्त हो सके।”
भविष्य की जरूरतों के लिए प्रशिक्षण और आधुनिकीकरण
विकास आयुक्त ने विभाग को निर्देश दिया है कि सोलर टेक्नोलॉजी, एसी तकनीशियन, प्लंबिंग, एनर्जी मैनेजमेंट, बैटरी टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ग्रीन जॉब्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जाएं। अग्रणी उद्योगों और कंपनियों के साथ साझेदारी करके उन्नत पाठ्यक्रम संचालित करने का भी निर्देश दिया गया। टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से राज्य के 149 आईटीआई संस्थानों का आधुनिकीकरण किया गया है। इन आधुनिक आईटीआई में इलेक्ट्रिक व्हीकल, इंडस्ट्री 4.0, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), रोबोटिक्स, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमेशन जैसे 23 अत्याधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
परीक्षण केंद्र और वैश्विक भाषा प्रशिक्षण की पहल
कौशल परीक्षण एवं प्रमाणन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए दशरथ मांझी कौशल एवं नियोजन परिसर में बेल्ट्रॉन के सहयोग से एक स्थायी परीक्षण एवं मूल्यांकन केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। यह केंद्र प्रतिदिन कम से कम 100 अभ्यर्थियों की क्षमता के साथ कौशल परीक्षण, टाइपिंग टेस्ट, एप्टीट्यूड मूल्यांकन और अन्य रोजगारोन्मुखी परीक्षण आयोजित करेगा। सफल अभ्यर्थियों को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) के सहयोग से प्रमाणन भी प्रदान किया जाएगा। ‘प्रधानमंत्री स्किलिंग फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एंड उन्नति (PM-SETU)’ कार्यक्रम के तहत राज्य में 15 हब और 60 स्पोक आईटीआई क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिनकी कुल परियोजना लागत ₹3,615 करोड़ है। यह कार्यक्रम उद्योग आधारित प्रशिक्षण, आधुनिक अवसंरचना और डिजिटल लर्निंग को नई दिशा देगा। वर्तमान में राज्य के आईटीआई संस्थानों में लगभग 76 प्रतिशत सीटें भरी हुई हैं। विकास आयुक्त ने उन संस्थानों में द्वितीय चरण में पात्रता शर्तों को सरल बनाने का निर्देश दिया, जहां 75 प्रतिशत से कम सीटें भरी हैं, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को प्रवेश मिल सके। युवाओं की वैश्विक रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए अंग्रेजी, जापानी, जर्मन और अरबी भाषाओं में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, और भविष्य में कोरियन, फ्रेंच एवं स्पेनिश भाषाओं को भी शामिल करने की योजना है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार संभावनाओं को देखते हुए महिला आईटीआई संस्थानों में हेल्थकेयर, पैरामेडिकल एवं मेडिकल सपोर्ट सेवाओं से संबंधित पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता देने पर भी बल दिया गया।
बिहार को कौशल विकास का अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य
राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित मेगा स्किल सेंटर, आर्यभट्ट इंटरनेशनल स्किल हब, रोजगार सेतु और PM-SETU जैसी पहलें बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर कौशल विकास और रोजगार सृजन के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। विकास आयुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर ‘सात निश्चय-3’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, रोजगार एवं स्वरोजगार के अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।






