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मार्च, 19, 2026
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Bihar Naxal crackdown: वैशाली में STF का बड़ा एक्शन, Muzaffurpur के दो वांछित अंतर प्रदेशीय माओवादी गिरफ्तार, कई जिलों में थी तलाश

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जंगलों और अंधेरे को अपना ठिकाना बनाने वाले दहशतगर्दों पर फिर पड़ी कानून की गाज। बिहार Naxal crackdown: विशेष कार्य बल (STF) ने वैशाली जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो ऐसे खूंखार माओवादियों को धर दबोचा है, जो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बने हुए थे। इन दोनों वांछित नक्सलियों पर हत्या सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं और ये बिहार के कई जिलों में अपने आपराधिक नेटवर्क को सक्रिय बनाए हुए थे। पुलिस के मुताबिक, इनकी गिरफ्तारी से नक्सली संगठनों को बड़ा झटका लगा है, खासकर वैशाली और मुजफ्फरपुर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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जानकारी के अनुसारबिहार एसटीएफ ने मुजफ्फरपुर में कई मामलों में वांछित दो माओवादियों, सुजीत पासवान और संतोष साह को वैशाली जिले से गिरफ्तार किया है। ये दोनों 13 साल पुराने आर्म्स एक्ट और एनआईए एक्ट के मामलों में फरार थे। सुजीत पर मुजफ्फरपुर में पांच और संतोष पर यूपी-बिहार में नौ नक्सल संबंधी मामले दर्ज हैं। टीम ने सुजीत पासवान को उसके घर से दबोचा। वह कुढ़नी (फकुली) थाना में वर्ष 2013 में दर्ज आर्म्स एक्ट और एनआईए एक्ट के मामले में वांछित था। उसके खिलाफ मुजफ्फरपुर जिले के विभिन्न थानों में हत्या, आर्म्स एक्ट समेत नक्सल से जुड़े पांच मामले दर्ज हैं।

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crackdown: STF को कई महीनों से थी तलाश?

इन माओवादियों की तलाश कई महीनों से की जा रही थी। STF को गुप्त सूचना मिली थी कि ये दोनों वैशाली जिले में छिपे हुए हैं और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही STF ने एक विशेष टीम का गठन किया और त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी कर दोनों को धर दबोचा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन नक्सलियों का प्रभाव क्षेत्र मुजफ्फरपुर, वैशाली और आसपास के कुछ अन्य जिलों तक फैला हुआ था।

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बिहार Naxal crackdown: STF ने कैसे बिछाया जाल?

खुफिया इनपुट और तकनीकी निगरानी के आधार पर STF ने अपनी रणनीति बनाई। टीम ने पहले इन माओवादियों की गतिविधियों पर नजर रखी और सही समय का इंतजार किया।गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों लगातार ठिकाना बदल रहे थे। जिला पुलिस के स्तर पर सफलता नहीं मिलने के बाद एसटीएफ को इस ऑपरेशन में लगाया गया था। जैसे ही इनकी मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिली, घेराबंदी कर इन्हें भागने का मौका दिए बिना गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं संतोष साह उर्फ अनिल साह को भी वैशाली जिले के काजीपुर थाना क्षेत्र स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया। वह वर्ष 2013 में दर्ज सीएलए एक्ट के मामले में वांछित था। उसके खिलाफ बिहार और उत्तर प्रदेश के कई थानों में हत्या, आर्म्स एक्ट सहित नक्सल से जुड़े नौ मामले दर्ज हैं। यह कार्रवाई बिहार में चल रहे नक्सली अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। गिरफ्तारी के बाद इन दोनों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इनके नेटवर्क और भविष्य की योजनाओं का पता चल सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

इनकी गिरफ्तारी से न केवल वर्तमान आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगेगा बल्कि भविष्य में होने वाली नक्सली वारदातों को रोकने में भी मदद मिलेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। बिहार पुलिस लगातार नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रही है, जिसका परिणाम ऐसी सफल गिरफ्तारियों के रूप में सामने आ रहा है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे नक्सली अभियान चलाकर राज्य को सुरक्षित बनाने में जुटी हैं। यह बिहार के अंदरूनी सुरक्षा के लिए एक शुभ संकेत है।

गिरफ्तारी के बाद खुलीं नक्सली वारदातों की परतें

पुलिस सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर अब इनके अन्य सहयोगियों और छिपने के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। उम्मीद है कि इस कार्रवाई से माओवादी संगठन की कमर तोड़ने में और भी सफलता मिलेगी। इनके खिलाफ लंबित मामलों में अब आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वैशाली और मुजफ्फरपुर के ग्रामीण इलाकों में नक्सलवाद के प्रभाव को कम करने की दिशा में यह एक बड़ी कामयाबी है। स्थानीय लोगों ने भी इस गिरफ्तारी पर संतोष व्यक्त किया है। सुरक्षा बल दृढ़ संकल्प के साथ बिहार को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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