Bihar Stone Mining: धरती के गर्भ से निकलते संसाधनों पर जब संकट गहराता है, तो सिर्फ कानून ही नहीं, प्रकृति भी सहम जाती है। बिहार में यह चिंता अब विकराल रूप ले रही है, क्योंकि पांच प्रमुख पत्थर खदानों की लीज अवधि समाप्त होने से अब अवैध खनन का खतरा बढ़ गया है।
Bihar Stone Mining: पांच खदानों की लीज हुई खत्म, बिहार में गहराया अवैध उत्खनन का खतरा
Bihar Stone Mining: अवैध उत्खनन की चुनौती और सरकारी कवायद
Bihar Stone Mining: बिहार में पत्थर खनन को लेकर एक गंभीर चिंता सामने आई है। राज्य की पांच प्रमुख पत्थर खदानों की खनन समय-सीमा समाप्त होने और उनके पट्टे निरस्त हो जाने के बाद अब अवैध उत्खनन की आशंका तेजी से गहराने लगी है। यह स्थिति न केवल राजस्व के लिए चुनौती है, बल्कि पर्यावरण संतुलन और कानून व्यवस्था के लिए भी खतरा पैदा कर रही है। खान एवं भूतत्व विभाग ने इस गंभीर हालात को देखते हुए राज्य के संबंधित जिलों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन खदानों में किसी भी प्रकार का अनधिकृत खनन न हो पाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि समाप्त हो चुकी लीज वाली खदानों से एक भी पत्थर बाहर न निकले। इसके लिए सख्त निगरानी और लगातार गश्त की आवश्यकता पर बल दिया गया है। विभाग का मानना है कि लीज अवधि समाप्त होते ही खनन माफिया सक्रिय हो जाते हैं, जो रातोंरात लाखों का चूना लगाने की फिराक में रहते हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन की सजगता ही इस चुनौती से निपटने का एकमात्र रास्ता है।
उत्खनन गतिविधियों पर सरकारी सख्ती
खान एवं भूतत्व विभाग ने अपने निर्देशों में स्पष्ट किया है कि जिन पांच खदानों की लीज रद्द हुई है, उन पर विशेष ध्यान दिया जाए। इनमें रोहतास और कैमूर जैसे पत्थर बहुल जिलों की खदानें शामिल हैं। विभाग ने इन क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी, चेकपोस्टों पर सख्ती और मुखबिरों से जानकारी जुटाने जैसे उपायों पर जोर दिया है। इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस थानों को भी सक्रिय भूमिका निभाने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि इन खदानों को फिर से चालू करने के लिए जल्द ही नई निविदा प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, लेकिन जब तक नई निविदाएं जारी नहीं होतीं और नए पट्टे आवंटित नहीं होते, तब तक किसी भी तरह के खनन की अनुमति नहीं होगी। अवैध खनन को रोकने के लिए विभाग ने त्वरित कार्रवाई दल (Rapid Action Force) गठित करने का भी प्रस्ताव रखा है, जो शिकायत मिलते ही मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर सके।
पर्यावरण और राजस्व पर दोहरा संकट
अवैध खनन न केवल सरकारी खजाने को चूना लगाता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। अनियंत्रित खुदाई से भूजल स्तर प्रभावित होता है, नदियों का प्रवाह बदल जाता है और मिट्टी का कटाव बढ़ता है, जिससे बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा, खनन गतिविधियों से निकलने वाले धूल कण वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं, जो स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन सब को देखते हुए विभाग ने जिला प्रशासन से अवैध गतिविधियों में शामिल वाहनों और मशीनरी को जब्त करने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस संकट के समय में राज्य का प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रहे और कानून का राज स्थापित हो। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। https://deshajtimes.com/news/national/




