Cyber Crime Bihar: डिजिटल अपराधियों का मकड़जाल दिनों-दिन घना होता जा रहा है, और इस दलदल में फंसने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। बिहार में इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने अब एक बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग ने केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम में संशोधन की मांग की गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में साइबर अपराधों की जांच प्रक्रिया को गति देना और इंस्पेक्टरों पर लगातार बढ़ते काम के बोझ को कम करना है।
Cyber Crime Bihar: जांच में तेजी लाने की कवायद
बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने जानकारी दी कि मौजूदा आईटी एक्ट के तहत केवल इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी ही ऐसे मामलों की जांच कर सकते हैं। राज्य में साइबर मामलों की जांच के लिए लगभग 1200 से 1300 इंस्पेक्टर उपलब्ध हैं। लेकिन, पिछले साल 2023 में (संभवतः 2025 का संदर्भ टाइपो है) साइबर थानों में कुल 6319 मामले दर्ज किए गए, जबकि ऑनलाइन धोखाधड़ी और इंटरनेट से जुड़े अन्य अपराधों की शिकायतें लाखों में थीं। एनसीआरपी हेल्पलाइन नंबर पर अकेले 27.96 लाख से अधिक कॉल आए, वहीं 1.17 लाख ऑनलाइन शिकायतें दर्ज हुईं। इंटरनेट मीडिया और अन्य साइबर अपराधों से संबंधित 15,218 शिकायतें भी प्राप्त हुईं। इस दौरान, पुलिस ने 1050 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार भी किया।
डीजीपी ने आगे बताया कि साइबर अपराधों की जांच में काफी समय लगता है, क्योंकि ये मामले अक्सर तकनीकी रूप से जटिल होते हैं और इनकी प्रकृति अंतर-राज्यीय होती है। अधिकांश ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में अपराधी दूसरे राज्यों से जुड़े होते हैं, और पैसे का लेन-देन या निकासी भी अलग-अलग जगहों से होती है। ऐसे में, जांच अधिकारी को बैंक और संबंधित स्थानों पर जाकर समन्वय करना पड़ता है। इसी कारण, एक इंस्पेक्टर साल भर में बमुश्किल छह से आठ से अधिक मामलों की जांच कर पाता है। यह कदम राज्य में साइबर अपराधों की जांच प्रक्रिया को तेज करने और इंस्पेक्टरों पर बढ़ते काम के बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
दारोगाओं को अधिकार, अपराधियों पर कसैगी लगाम
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, राज्य सरकार दारोगा रैंक के अधिकारियों को भी साइबर मामलों की जांच का अधिकार देने की तैयारी में है। बिहार में करीब 12 से 13 हजार दारोगा रैंक के पदाधिकारी कार्यरत हैं। यदि उन्हें साइबर मामलों की जांच का अधिकार मिल जाता है, तो अनुसंधान पदाधिकारियों की संख्या लगभग दस गुना तक बढ़ जाएगी। इस कदम से न केवल इंस्पेक्टरों पर काम का बोझ कम होगा, बल्कि साइबर मामलों की जांच में भी अभूतपूर्व तेजी आएगी।
बढ़ते डिजिटल अपराधों और उनके तकनीकी स्वरूप को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने साइबर थानों में मानवबल बढ़ाने की भी योजना बनाई है। डीजीपी ने बताया कि सभी जिलों के साइबर थानों में आईटी और कंप्यूटर पृष्ठभूमि वाले पुलिस अधिकारियों को पहले ही तैनात किया जा चुका है। आने वाले समय में साइबर थानों में और अधिक मानवबल की तैनाती की जाएगी, जिससे जांच प्रक्रिया और भी अधिक प्रभावी होगी। यदि उन्हें साइबर मामलों की जांच का अधिकार मिल जाता है, तो अनुसंधान पदाधिकारियों की संख्या लगभग दस गुना तक बढ़ जाएगी आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
गृह विभाग ने अपने प्रस्ताव में यह भी कहा है कि आईटी एक्ट में संशोधन के बाद, दारोगा रैंक के अधिकारी न्यूनतम इंस्पेक्टर रैंक के समकक्ष ही जांच करने में सक्षम होंगे। इससे तकनीकी मामलों और अंतर-राज्यीय साइबर अपराधों के समाधान में लगने वाले समय में कमी आएगी। डीजीपी ने जोर देकर कहा कि यह महत्वपूर्ण कदम साइबर अपराधियों को पकड़कर उन्हें कानून के कटघरे में लाने और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम समय की मांग बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दारोगा रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार मिलने से न केवल मामलों की त्वरित सुनवाई संभव होगी, बल्कि पुलिस के मानवबल का अधिक कुशल तरीके से उपयोग भी किया जा सकेगा। इसके अलावा, इस बदलाव से साइबर अपराधों से जुड़े डेटा एनालिसिस, बैंकिंग लेन-देन की जांच और अन्य तकनीकी जांच प्रक्रियाओं को भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
राज्य सरकार की यह पहल साइबर अपराधों के खिलाफ एक सख्त और निर्णायक कदम के रूप में देखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आईटी एक्ट में आवश्यक संशोधन के बाद यह बदलाव लागू कर दिया जाएगा, जिससे बिहार में साइबर अपराधों की जांच और नियंत्रण में उल्लेखनीय सुधार आएगा। इस तरह, दारोगा रैंक के अधिकारियों को जांच का अधिकार देने का यह प्रस्ताव राज्य में साइबर अपराधों की बेहतर और तेज जांच सुनिश्चित करेगा, जबकि इंस्पेक्टरों पर काम का बोझ भी घटेगा और समग्र जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

