

Bihar Sugar Industry: एक था खस्ताहाल उद्योग, जो कभी बिहार की शान था। वक्त की धूल फांकता, वह अब फिर से उठ खड़ा होने को बेताब है। बिहार सरकार ने इसे संजीवनी देने का बीड़ा उठाया है, ताकि राज्य की समृद्धि में फिर से मिठास घुल सके।
Bihar Sugar Industry: बंद पड़ी मिलों को मिलेगी नई जान
बिहार सरकार ने अपने महत्वाकांक्षी सात निश्चय-3 योजना के तहत ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए गन्ना उद्योग में व्यापक सुधारों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। दशकों से बंद पड़ी चीनी मिलों को चरणबद्ध तरीके से फिर से संचालित करने के साथ ही, राज्य में 25 नई अत्याधुनिक चीनी मिलों की स्थापना की योजना है। यह पहल न केवल राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को बदलेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। राज्य में कई चीनी मिलें ऐसी हैं जो वर्षों से बंद पड़ी हैं, जिससे हजारों गन्ना किसानों की आजीविका प्रभावित हुई है और क्षेत्र में आर्थिक गति थम सी गई थी। सरकार ने इन बंद पड़ी मिलों को फिर से शुरू करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत निजी निवेशकों को आकर्षित किया जाएगा और तकनीकी उन्नयन के साथ उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जाएगा। इस पहल से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। गन्ना किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार और उचित मूल्य प्राप्त होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
नए निवेश से औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
गन्ना उद्योग के पुनरुद्धार और नई मिलों की स्थापना से बिहार में औद्योगिक विकास को एक नई रफ्तार मिलेगी। इन नई इकाइयों में नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और चीनी के साथ-साथ इथेनॉल जैसे सह-उत्पादों का उत्पादन भी संभव होगा। यह कदम आत्मनिर्भर बिहार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
राज्य में मिठास घोलेगी नई औद्योगिक नीति
सरकार की नई औद्योगिक नीति इस पूरे अभियान को समर्थन दे रही है। इसका उद्देश्य निवेशकों को अनुकूल माहौल प्रदान करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। इस नीति के तहत, चीनी उद्योग को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा गया है, ताकि निवेश आकर्षित हो सके और राज्य में चीनी उत्पादन का खोया हुआ गौरव वापस आ सके। यह केवल चीनी उत्पादन की बात नहीं, बल्कि बिहार के समग्र आर्थिक विकास की आधारशिला भी है।

