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फ़रवरी, 23, 2026
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Bihar Teacher Pension: 50 हज़ार शिक्षकों और कर्मचारियों की अटकी पेंशन, जानें पूरा मामला!

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Bihar Teacher Pension: ज़िंदगी की ढलती साँझ में जब सहारे की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है, तब सरकारी दस्तावेज़ों की उलझन एक कड़वा सच बनकर सामने आ जाती है। बिहार के हज़ारों सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए जनवरी का महीना इसी कड़वाहट के साथ शुरू हुआ है।

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बिहार के विश्वविद्यालयों द्वारा बरती जा रही घोर लापरवाही अब हज़ारों रिटायर्ड शिक्षकों और कर्मचारियों पर भारी पड़ रही है। राज्य के वित्त विभाग ने लगभग 50,000 सेवानिवृत्त शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के जनवरी माह के पेंशन भुगतान पर रोक लगा दी है। इस फैसले से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है, और वृद्ध जनों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। यह एक गंभीर मुद्दा है और आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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Bihar Teacher Pension: क्यों गहराया पेंशन संकट?

वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस पेंशन स्थगन का मुख्य कारण विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा ‘उपयोगिता प्रमाण-पत्र’ (Utilization Certificate – UC) समय पर जमा न करना है। नियमों के तहत, विश्वविद्यालयों को सरकार से मिली राशि के उपयोग का प्रमाण-पत्र जमा करना अनिवार्य होता है ताकि आगे की वित्तीय सहायता और भुगतान जारी रह सकें। लेकिन कई विश्वविद्यालयों ने इस प्रक्रिया में कोताही बरती है, जिसका सीधा खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित कर दी।

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राज्य सरकार के वित्त विभाग ने बार-बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद, जब विश्वविद्यालयों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो विभाग को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। विभाग का कहना है कि नियमों का पालन न होने पर भुगतान जारी रखना संभव नहीं है। यह स्थिति बिहार के उच्च शिक्षा संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन की कमज़ोरियों को उजागर करती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

वित्त विभाग का कड़ा रुख और आगे की राह

इस अप्रत्याशित रोक से प्रभावित शिक्षक और कर्मचारी अब गहरे चिंता में हैं। जनवरी माह की पेंशन रुकने से उनके दैनिक ख़र्चों, दवाओं और अन्य आवश्यकताओं पर सीधा असर पड़ा है। कई संगठनों ने वित्त विभाग और राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और समाधान निकालने की अपील की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विभाग का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह वित्तीय अनुशासन को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहता। हालांकि, मानवीय आधार पर इन सेवानिवृत्त लोगों की समस्याओं को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उम्मीद है कि जल्द ही विश्वविद्यालयों को इस उपयोगिता प्रमाण-पत्र को जमा करने की प्रक्रिया में तेज़ी लानी होगी ताकि हज़ारों परिवारों को राहत मिल सके। राज्य सरकार को इस मसले का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में भी सोचना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

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