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फ़रवरी, 14, 2026
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Special Report : Bihar की सड़कों पर Plastic Road का कमाल, अब कचरा बनेगा गांवों के विकास का नया हाईवे, जानिए पूरी योजना

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Plastic Road: कल तक जो प्लास्टिक गलियों का नासूर और पर्यावरण का दुश्मन बना हुआ था, आज वही बिहार की ग्रामीण सड़कों की तकदीर लिख रहा है। यह कायापलट कचरे से कनेक्टिविटी की एक अनूठी कहानी बयां कर रहा है, जहां अनुपयोगी कचरा अब विकास की राह बना रहा है।

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बिहार में Plastic Road निर्माण की अनोखी पहल

जिस सिंगल यूज प्लास्टिक को अब तक एक लाइलाज समस्या समझा जा रहा था, वह अब बिहार के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदल रहा है। घर-घर से इकट्ठा होने वाला यह प्लास्टिक कचरा अब ग्रामीण सड़कों को मजबूती देने का काम कर रहा है। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (एलएसबीए) के तहत यह बड़ी सफलता मिली है। विभाग ने ग्रामीण कार्य विभाग के साथ मिलकर प्लास्टिक कचरे से राज्य के तीन जिलों में लगभग 10.5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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इन जिलों में हुआ सफल प्रयोग

यह नवाचार कचरे से सड़क बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। शुरुआती चरण में बिहार के तीन जिलों में इस तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है:

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  • पूर्णिया: 4.05 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए 3.08 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे का उपयोग।
  • खगड़िया: 01 किलोमीटर सड़क के निर्माण में 01 मीट्रिक टन प्लास्टिक अपशिष्ट का इस्तेमाल।
  • औरंगाबाद: 05 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए 3.5 मीट्रिक टन प्लास्टिक का प्रयोग।
यह भी पढ़ें:  Bihar Land Reforms: जमीन विवादों का होगा अंत! बिहार में मार्च से हर जिले में लगेगा 'जनकल्याण संवाद'

इन जिलों में मिली सफलता के बाद अब सरकार इस योजना को राज्य के अन्य हिस्सों में भी लागू करने की तैयारी कर रही है।

स्वच्छता से सड़क तक की पूरी प्रक्रिया

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत पहले गांवों में घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा किया जाता है। इस कचरे से सिंगल यूज प्लास्टिक को अलग कर राज्य की 171 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों में भेजा जाता है। यहां प्लास्टिक का प्रसंस्करण कर उसे सड़क निर्माण के योग्य बनाया जाता है। एलएसबीए के राज्य सलाहकार रतनीश वर्मा के अनुसार, इस प्रसंस्कृत प्लास्टिक को गर्म तारकोल (डामर) के साथ लगभग 7 प्रतिशत के अनुपात में मिलाया जाता है। यह मिश्रण पारंपरिक मिश्रण से कहीं ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होता है। इस सफल प्लास्टिक कचरा प्रबंधन मॉडल की हर जगह सराहना हो रही है।

इस तकनीक से बनी सड़कों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन पर जलजमाव का कोई असर नहीं होता, जिससे उनकी उम्र सामान्य सड़कों से कई गुना बढ़ जाती है। यह पहल न केवल गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी दे रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

क्या कहते हैं मंत्री

इस मामले पर राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करना है। प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल कर इन Plastic Road का निर्माण करना एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका लक्ष्य जलजमाव वाले क्षेत्रों में भी मजबूत सड़कें बनाना और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना है।” उन्होंने आगे बताया कि इस योजना को जल्द ही अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जाएगा, ताकि स्वच्छता और विकास साथ-साथ चलें। यह पहल वाकई शानदार है और आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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