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बिहार के सब्जी किसान: ‘तरकारी’ ब्रांड से बदलेगी किस्मत, पढ़िए ‘वेजीफेड’ और डेयरी की तर्ज पर मिलेंगी सब्जियां!

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बिहार के सब्जी किसान: कभी बिचौलियों के जाल में फंसकर सब्जियों का वाजिब दाम न पाने वाले किसानों के चेहरे अब खिलने वाले हैं। खेतों से सीधे थाली तक पहुँचने की राह में, सहकारिता विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है, जो उनकी मेहनत का मीठा फल उन्हें ही दिलाएगा।

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बिहार के सब्जी किसान: ‘तरकारी’ ब्रांड से बदलेगी किस्मत, सुधा डेयरी की तर्ज पर बिकेंगी सब्जियां

बिहार के सब्जी किसानों के लिए ‘वेजीफेड’ का नया सवेरा

राज्य में सब्जी उत्पादक किसानों को उनके उत्पादों के लिए एक सुव्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में बिहार सरकार के सहकारिता विभाग ने एक ऐतिहासिक पहल की है। विभाग ने सब्जी की खरीद-बिक्री, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देने के लिए वेजीफेड (बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी फेडरेशन लिमिटेड) नामक एक नई संस्था का गठन किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, प्रदेश में सुधा डेयरी की तर्ज पर ‘तरकारी’ ब्रांड के आउटलेट खोले जाएंगे। इन आउटलेट के माध्यम से किसानों की ताज़ी सब्जियां सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जाएंगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।

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यह वेजीफेड, कामफेड की कार्यप्रणाली के समान ही काम करेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी सब्जियों को सीधे बाजार तक पहुंचाने में सहायता करना है है। इस पहल के तहत राज्य भर में कुल नौ यूनियन स्थापित किए गए हैं। समस्तीपुर जिला इनमें से हरित यूनियन का हिस्सा होगा, जिसका मुख्यालय राजधानी पटना में स्थित होगा। इसके अतिरिक्त, मिथिला यूनियन में दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जैसे जिलों को शामिल किया गया है। इन सभी जिलों के सब्जी उत्पादक किसानों को भी इस अभिनव योजना से जोड़ने का कार्य तेजी से चल रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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वेजीफेड को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए सहकारिता विभाग व्यापक आधारभूत संरचना विकसित कर रहा है। यह व्यवस्था तीन मुख्य स्तरों पर तैयार की जा रही है: प्रखंड स्तर पर सब्जी कलेक्शन सेंटर, प्याज के भंडारण के लिए विशेष संरचनाएं, और उत्पादों की बिक्री के लिए प्रखंडवार छोटे-छोटे आउटलेट। समस्तीपुर जिले में ताजपुर में एक अत्याधुनिक सब्जी कलेक्शन सेंटर बनकर पूरी तरह से तैयार हो चुका है। वहीं, पटोरी, दलसिंहसराय, हसनपुर, बिथान और कल्याणपुर जैसे अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिन्हें जल्द से जल्द पूरा करने की योजना है। इस वेजीफेड योजना से राज्य में कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

इस योजना का सबसे अधिक लाभ छोटे और मध्यम वर्ग के उन किसानों को मिलेगा, जो अक्सर बाजार की अनिश्चितताओं और बिचौलियों के शोषण का शिकार होते रहे हैं। किसानों को सहकारी समिति के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए जाएंगे, जिसके लिए उन्हें केवल 25 प्रतिशत राशि अग्रिम भुगतान के रूप में देनी होगी। शेष भुगतान फसल तैयार होने के बाद किया जाएगा, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस राशि पर कोई ब्याज नहीं लिया जाएगा। किसान अपने उत्पादों को इन कलेक्शन सेंटरों के माध्यम से आसानी से बेच सकेंगे, जिससे उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

सहकारिता विभाग ने फिलहाल ओल, मिर्च और प्याज जैसी तीन प्रमुख फसलों की खेती को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस योजना में शामिल करने की तैयारी की है। आने वाले समय में, सफल क्रियान्वयन के बाद, अन्य सब्जियों को भी चरणबद्ध तरीके से इस वेजीफेड योजना के दायरे में लाया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

मजबूत हो रही ‘वेजीफेड’ की आधारभूत संरचना

मिथिला यूनियन की बात करें तो, इसमें दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिलों के कुल 73 प्रखंड शामिल किए गए हैं। इन क्षेत्रों में भी आधारभूत संरचना विकसित करने का कार्य जोर-शोर से चल रहा है, और वर्तमान में 16 स्थानों पर निर्माण कार्य जारी है।

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मिथिला यूनियन के सीईओ अरुण कुमार ने जानकारी दी कि सहकारिता विभाग ने किसानों के हित में कामफेड की तर्ज पर वेजीफेड की शुरुआत की है। राज्य में कुल नौ यूनियन बनाए गए हैं और सभी जगहों पर आवश्यक आधारभूत ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। इस पूरी व्यवस्था का संचालन प्रखंड स्तर पर मौजूद सब्जी उत्पादक संघों के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बहुत जल्द ही ‘तरकारी’ ब्रांड के आउटलेट भी शुरू कर दिए जाएंगे, जिससे बिहार के सब्जी किसानों को सीधा लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

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