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फ़रवरी, 14, 2026
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Bihar VIP Number Plate: बिहार में ‘शाही’ नंबरों का बढ़ता क्रेज, दो महीने में 6 करोड़ की कमाई, पटना अव्वल

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Bihar VIP Number Plate: सड़कों पर रफ्तार भरती गाड़ियों के लिए अब सिर्फ इंजन नहीं, बल्कि उनकी पहचान भी मायने रखती है। ठीक वैसे ही जैसे किसी राजा के मुकुट में जड़े हीरे। बिहार में वाहनों के फैंसी और वीआईपी नंबर का क्रेज अब एक नया रिकॉर्ड बना रहा है, जहां लोग अपनी गाड़ियों को खास बनाने के लिए लाखों खर्च करने से भी गुरेज नहीं कर रहे।

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ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में फैंसी और वीआईपी नंबरों की ई-नीलामी के जरिए महज दो महीनों में सरकार ने करीब 6 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि लोग अपनी गाड़ियों के लिए खास पहचान बनाने के लिए कितनी उत्सुकता दिखा रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह प्रवृत्ति न केवल वाहन मालिकों की प्रतिष्ठा को दर्शाती है, बल्कि राज्य के खजाने को भरने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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Bihar VIP Number Plate: फैंसी नंबरों की दौड़ में पटना सबसे आगे

इस दौड़ में बिहार की राजधानी पटना के वाहन मालिक सबसे आगे रहे हैं। पटना में फैंसी नंबरों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे राज्य के कुल राजस्व में इनकी हिस्सेदारी सबसे अधिक है। खास नंबरों के लिए ई-नीलामी की प्रक्रिया ने पारदर्शिता और पहुंच दोनों को बढ़ाया है, जिससे आम लोगों के लिए भी अपने मनपसंद नंबर प्राप्त करना आसान हो गया है।

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परिवहन विभाग द्वारा संचालित यह ई-नीलामी प्रणाली लोगों को अपनी पसंदीदा संख्या बोली लगाकर प्राप्त करने का अवसर देती है। इस प्रक्रिया में 0001, 7777, 9999 जैसे नंबरों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जाती है। ऐसे नंबरों की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि कई बार इनकी कीमतें मूल निर्धारित मूल्य से कई गुना अधिक तक पहुंच जाती हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

राजस्व में रिकॉर्ड उछाल

वीआईपी नंबर प्लेट्स के प्रति यह बढ़ती दीवानगी सरकार के लिए एक स्थायी आय का स्रोत बन गई है। यह दर्शाता है कि राज्य में लग्जरी और स्टेटस सिंबल के प्रति लोगों का रुझान कितना बढ़ा है। आने वाले समय में यह आंकड़ा और भी बढ़ने की संभावना है, क्योंकि लोग अपनी पहचान को अपनी गाड़ियों के जरिए भी व्यक्त करना चाहते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। परिवहन विभाग भी इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ कर रहा है, ताकि यह प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहे और अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

कुल मिलाकर, बिहार में फैंसी और वीआईपी नंबरों का क्रेज सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि एक ट्रेंड बन चुका है जो राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहा है और लोगों को अपनी गाड़ियों को एक अनूठी पहचान देने का अवसर प्रदान कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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