Brijnandan Sharma Death: शिक्षा के आंगन में एक युग का अवसान हो गया। बिहार के शिक्षकों के मसीहा कहे जाने वाले वरिष्ठ शिक्षक नेता ब्रजनंदन शर्मा अब नहीं रहे। उन्होंने पटना में मंगलवार सुबह करीब 5 बजे अंतिम सांस ली। 106 वर्ष की दीर्घायु तक सक्रिय सार्वजनिक जीवन जीने वाले शर्मा जी केवल एक संगठन के अध्यक्ष नहीं थे, बल्कि वे बिहार के शिक्षकों के लिए एक संस्था थे।
Brijnandan Sharma Death: बिहार के शिक्षकों के ‘मसीहा’ ब्रजनंदन शर्मा का निधन, 106 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस
Brijnandan Sharma Death: एक सदी का लंबा सफर और शिक्षक हितों का संघर्ष
ब्रजनंदन शर्मा जी का जीवन अपने आप में एक प्रेरणा था। उन्होंने एक सदी से अधिक का सफर तय किया और इस दौरान बिहार की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों के हक की लड़ाई लड़ने में अपना अमूल्य योगदान दिया। बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका अप्रतिम रही। उनके नेतृत्व में हुए अनगिनत शिक्षक आंदोलन, शिक्षकों के वेतनमान, सेवा शर्तों और सम्मान के लिए मील का पत्थर साबित हुए। शिक्षकों के बीच उनकी लोकप्रियता ऐसी थी कि उन्हें ‘मसीहा’ कहा जाने लगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनका निधन बिहार के शिक्षक समुदाय के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
शर्मा जी का सार्वजनिक जीवन सिर्फ शिक्षक संघ तक सीमित नहीं था। वे एक दूरदर्शी नेता थे जिन्होंने शिक्षा के हर पहलू पर गहन चिंतन किया। उन्होंने न केवल अधिकारों की बात की, बल्कि कर्तव्यों और बेहतर शिक्षा प्रणाली के लिए भी लगातार प्रयास किए। उनके विचार और कार्य आज भी हजारों शिक्षकों को प्रेरित करते हैं। उनका निधन ऐसे समय में हुआ है जब बिहार की शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, और ऐसे में उनके मार्गदर्शन की कमी निश्चित रूप से खलेगी।
शिक्षक राजनीति के पुरोधा और प्रेरणा स्रोत
ब्रजनंदन शर्मा जी ने अपने जीवनकाल में कई सरकारों को देखा और हर सरकार के सामने शिक्षकों की समस्याओं को मुखरता से रखा। उनकी स्पष्टवादिता और दृढ़ संकल्प ने उन्हें शिक्षक समुदाय का निर्विवाद नेता बना दिया था। उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और हमेशा शिक्षकों के हितों को सर्वोपरि रखा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनके मार्गदर्शन में ही बिहार में कई महत्वपूर्ण शिक्षा सुधारों की नींव रखी गई। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। उनके निधन से एक ऐसे अध्याय का अंत हो गया है जिसने बिहार के शिक्षक आंदोलन को एक नई दिशा और पहचान दी।
उनके साथी शिक्षक नेता बताते हैं कि शर्मा जी का ऊर्जा स्तर किसी युवा से कम नहीं था। 106 वर्ष की आयु में भी वे सक्रिय रहते थे और बैठकों में अपनी राय पूरी स्पष्टता से रखते थे। उनका मार्गदर्शन हमेशा उपलब्ध रहता था, जिससे युवा नेताओं को काफी मदद मिलती थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनका जाना बिहार के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बड़ा शून्य पैदा कर गया है। उनके निधन पर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।




