Maithili Language: बिहार के मिथिलांचल के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है! केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने आखिरकार मैथिली भाषा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। अब CBSE स्कूलों के छात्र कक्षा 1 से लेकर माध्यमिक स्तर तक मैथिली को अपनी मातृभाषा विषय के रूप में पढ़ सकेंगे। इस फैसले से मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भाषाई गौरव को एक नई पहचान मिली है, जिसका लंबे समय से इंतजार था।
सीबीएसई में मैथिली का समावेश: एक ऐतिहासिक कदम
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने दरभंगा के सांसद गोपालजी ठाकुर को पत्र लिखकर इस महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि की है। मैथिली अब देश की उन 22 मातृभाषाओं की श्रेणी में शामिल हो गई है, जिनकी पढ़ाई राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय शिक्षा माध्यमिक बोर्ड के स्कूलों में होती है। सांसद गोपालजी ठाकुर लगातार इसके लिए अभियान चला रहे थे। उनके प्रयासों को तब सफलता मिली जब केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उनके पत्र के बाद एनसीईआरटी से आवश्यक जांच कराई गई।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के आलोक में, कक्षा 5 तक और यथासंभव कक्षा 8 तक मातृभाषा में पढ़ाई का प्रावधान है। इसी आधार पर Maithili Language को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। एनसीईआरटी ने मैथिली सहित 22 अनुसूचित भाषाओं में किताबों का अनुवाद भी शुरू कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह निर्णय खास तौर पर मिथिलांचल के लोगों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो अपनी भाषा और संस्कृति को लेकर हमेशा सजग रहे हैं।
Maithili Language को लेकर क्या बोले CM सम्राट चौधरी और सांसद गोपालजी ठाकुर?
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार जताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि यह फैसला मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता और भाषाई गौरव के लिए गर्व का विषय है। सीएम ने जोर देकर कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन को निरंतर नई मजबूती मिल रही है। यह निर्णय न केवल मैथिली भाषा को नई पहचान और सम्मान देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बनेगा।
सांसद गोपालजी ठाकुर ने भी केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके लगातार प्रयासों को सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि CBSE के साथ-साथ CTET में भी मैथिलांचल वासियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सभी मिथिला वासियों की ओर से धन्यवाद दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मातृभाषा का महत्व
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मातृभाषा में शिक्षा पर विशेष जोर देती है। यह माना गया है कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा यदि उनकी मातृभाषा में होती है, तो वे विषयों को बेहतर ढंग से समझते हैं और उनमें सीखने की क्षमता बढ़ती है। मैथिली भाषा का CBSE पाठ्यक्रम में शामिल होना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश की भाषाई विविधता का सम्मान करता है और क्षेत्रीय भाषाओं को मुख्यधारा में लाता है। यह कदम बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में मदद करेगा और उनकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






