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मार्च, 12, 2026
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चिराग पासवान के एक दावे से बिहार में सियासी भूचाल, महागठबंधन खेमे में मच गई खलबली?

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पटना:

बिहार की सियासत में क्या कोई नया ‘खेला’ होने वाला है? ये सवाल अचानक से हवा में तैरने लगा है, और इसकी वजह है चिराग पासवान का एक बयान. उन्होंने एक ऐसी बात कह दी है, जिसने महागठबंधन के भीतर खलबली मचा दी है और सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है.

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चिराग पासवान का बड़ा दावा

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एनडीए के प्रमुख सहयोगी, चिराग पासवान ने दावा किया है कि विपक्षी महागठबंधन के कई विधायक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के संपर्क में हैं. उन्होंने यह कहकर बिहार की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है. हालांकि, उन्होंने किसी विधायक का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह इशारा ही महागठबंधन में बेचैनी पैदा करने के लिए काफी है.

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चिराग का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति वैसे ही काफी नाजुक दौर से गुजर रही है. इस दावे ने उन अटकलों को और हवा दे दी है कि क्या राज्य में एक बार फिर कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है.

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क्या हैं इस बयान के सियासी मायने?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान का यह बयान सिर्फ एक सामान्य टिप्पणी नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं. यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद विपक्ष के मनोबल को तोड़ना और उनके कुनबे में अविश्वास का बीज बोना है. इस तरह के बयानों से अक्सर पार्टियों के भीतर संदेह का माहौल बनता है, जहां हर कोई एक-दूसरे को शक की नजर से देखने लगता है.

यह दावा महागठबंधन के उन विधायकों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बना सकता है जो शायद अपनी पार्टी के नेतृत्व से नाखुश हों. उन्हें यह संदेश जाता है कि उनके लिए एनडीए के दरवाजे खुले हो सकते हैं, जिससे पाला बदलने की संभावनाओं को बल मिलता है.

महागठबंधन में बेचैनी, एनडीए में चुप्पी

चिराग पासवान के इस दावे के बाद महागठबंधन के खेमे में हलचल तेज हो गई है. हालांकि अभी तक किसी बड़े नेता ने इस पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंदरखाने इस बयान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. पार्टियां अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में लग सकती हैं. वहीं, दूसरी ओर एनडीए के बड़े नेताओं ने इस पर सधी हुई चुप्पी साध रखी है, जिससे इन अटकलों को और भी बल मिल रहा है.

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या चिराग पासवान का यह दावा महज एक सियासी बयानबाजी बनकर रह जाता है या फिर आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति वाकई कोई नई करवट लेती है. फिलहाल, इस एक बयान ने राज्य का सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है.

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