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जनवरी, 7, 2026

Bihar Naxal: दयानंद मालाकार के खात्मे के बाद उत्तरी बिहार में ऐसे ध्वस्त हुआ नक्सलवाद का साम्राज्य!

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Bihar Naxal: काले बादलों की तरह दशकों तक जिसने बिहार के शांतिपूर्ण आकाश को घेरे रखा, आज उसका अस्त हो चुका है। उत्तरी बिहार में दहशत और हिंसा का पर्याय बन चुके नक्सलवाद का साम्राज्य आखिरकार ध्वस्त हो गया है।

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Bihar Naxal: लंबे समय से कुख्यात रहा बेगूसराय जिले का तेघड़ा थाना क्षेत्र का नोनपुर इलाका, जहां नक्सली गतिविधियां चरम पर थीं, अब सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई के बाद शांत हो चला है। यह सब संभव हो पाया है दुर्दांत नक्सली दयानंद मालाकार के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद। इस एक घटना ने पूरे उत्तर बिहार के नक्सली नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंका है, जिससे क्षेत्र में शांति और व्यवस्था का नया दौर शुरू हुआ है। मालाकार की मौत के बाद, कई छोटे-बड़े नक्सली संगठन कमजोर पड़ गए और उनके मंसूबे धरे रह गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है।

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उत्तरी बिहार में Bihar Naxal: क्यों था तेघड़ा का नोनपुर कुख्यात?

तेघड़ा का नोनपुर क्षेत्र दशकों से नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहां के दुर्गम भौगोलिक हालात और सामाजिक-आर्थिक विषमता ने नक्सलियों को अपनी जड़ें जमाने में मदद की थी। ग्रामीण इलाकों में भय और आतंक का माहौल बनाकर नक्सली संगठन अपनी समानांतर सत्ता चलाते थे। फिरौती, रंगदारी और लेवी उगाही उनके मुख्य धंधे थे, जिससे वे अपने नेटवर्क को मजबूत करते थे। स्थानीय लोगों के बीच पुलिस का भय और नक्सलियों का खौफ एक साथ मौजूद था। कई बार पुलिस पर हमले और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी यहीं से अंजाम दी गईं। मालाकार जैसे खूंखार सरगना की मौजूदगी ने इस क्षेत्र को और भी संवेदनशील बना दिया था।

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दयानंद मालाकार उत्तर बिहार के सबसे बड़े नक्सली कमांडरों में से एक था। उसकी मौत सिर्फ एक व्यक्ति का अंत नहीं, बल्कि एक युग का समापन है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मालाकार के मारे जाने के बाद, उसके बचे हुए साथियों में भगदड़ मच गई। कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जबकि कुछ जंगल में छिप गए, लेकिन उनका नेटवर्क पूरी तरह से बिखर चुका है। इस सफलता को सुरक्षा बलों की अथक मेहनत और सटीक खुफिया जानकारी का परिणाम माना जा रहा है। अब क्षेत्र के लोग अमन-चैन की सांस ले रहे हैं और विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। यह एक महत्वपूर्ण कदम है बिहार को नक्सलवाद मुक्त बनाने की दिशा में। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई

पुलिस और प्रशासन अब बचे हुए नक्सली तत्वों को मुख्यधारा में लाने और उन क्षेत्रों में विकास योजनाओं को तेजी से लागू करने पर जोर दे रहा है, जो कभी नक्सल प्रभावित रहे थे। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाकर, नक्सलवाद की सामाजिक जड़ों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर युवाओं को गुमराह होने से बचाया जा रहा है। यह सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि एक समग्र रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बिहार से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया करना है। सुरक्षा बलों की सतर्कता और जनता के सहयोग से ही इस लड़ाई को अंतिम मुकाम तक पहुंचाया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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