Delhi Railway Tender Scam News: दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने रेलवे टेंडर घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ आरोप तय करने के अपने फैसले को एक बार फिर स्थगित कर दिया है। यह तीसरी बार है जब अदालत ने इस महत्वपूर्ण मामले में निर्णय टाल दिया है। इस फैसले के टलने से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव सहित अन्य आरोपियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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क्या है रेलवे टेंडर घोटाला और लालू यादव पर गंभीर आरोप?
यह मामला रेलवे के दो होटलों के टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री के पद पर आसीन थे, तब उन्होंने रांची और पुरी स्थित भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के दो होटलों को कंपनी को हस्तांतरित किया था। इन होटलों के रखरखाव और संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी।
इन टेंडरों के आवंटन में भारी अनियमितता का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार, रांची और पुरी के इन दोनों होटलों का ठेका कोचर बंधुओं की कंपनी, सुजाता होटल, को सौंप दिया गया था। आरोप यह है कि इस अनुचित आवंटन के बदले में, लालू यादव और उनके परिवार को कथित तौर पर बेनामी संपत्तियों के रूप में जमीन मिली, जिसे एक ‘क्विड प्रो क्वो’ (Quid Pro Quo) डील बताया जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस लेनदेन में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की गहन जांच कर रहा है।
सुनवाई का विस्तृत घटनाक्रम और आरोपियों की जमानत
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने इस मामले में आरोप तय करने पर फैसला सुनाने के लिए 16 जुलाई की नई तारीख निर्धारित की है। इससे पहले भी, कोर्ट ने इस मामले में 22 मई और 6 मई को अपना निर्णय टाल दिया था, जिससे प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है। अदालत ने मूल रूप से 13 फरवरी को इस संबंध में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन तब से यह कई बार स्थगित हो चुका है।
इस केस के घटनाक्रम को देखें तो, 28 जनवरी, 2019 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को नियमित जमानत प्रदान की थी। उन्हें एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर यह जमानत मिली थी। इसी प्रकार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज रेलवे टेंडर घोटाले के एक अन्य संबंधित मामले में, कोर्ट ने 19 जनवरी, 2019 को लालू यादव को नियमित जमानत दी थी। कोर्ट ने 13 अक्टूबर, 2025 को सीबीआई से जुड़े इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। ईडी ने 17 सितंबर, 2018 को इस मामले में अपनी विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर कोर्ट ने संज्ञान लिया था। यह घटनाक्रम Bihar Politics News के लिए भी काफी अहम है, क्योंकि इसका सीधा असर राज्य की राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
इन प्रमुख नामों को बनाया गया है आरोपी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी चार्जशीट में इस मामले में कुल 16 व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी बनाया है। इन आरोपियों की सूची काफी लंबी है और इसमें कई जाने-माने नाम शामिल हैं। मुख्य आरोपियों में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और पुत्र तेजस्वी यादव का नाम प्रमुखता से है।
अन्य आरोपियों में मेसर्स लारा प्रोजेक्ट एलएलपी, सरला गुप्ता, प्रेमचंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, मेसर्स सुजाता होटल, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलान और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इतने अधिक आरोपियों के कारण भी यह मामला कानूनी रूप से काफी जटिल हो गया है, जिसकी सुनवाई में अधिक समय लग रहा है।
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रेलवे टेंडर घोटाला देश के सबसे चर्चित घोटालों में से एक है, और इस पर आने वाला हर फैसला राजनीति और आम जनता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। अब सभी की निगाहें 16 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह उम्मीद की जा रही है कि राउज एवेन्यू कोर्ट आरोप तय करने पर अपना अंतिम निर्णय सुनाएगा। इस मामले के परिणाम का भारतीय राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







