

Patna News: क़ानून की रस्सियाँ कभी-कभी इतनी उलझ जाती हैं कि अपराधी भी छूट जाते हैं, और न्याय की आँखें बस देखती रह जाती हैं। पटना में कुख्यात आरोपी देवा गुप्ता की गिरफ्तारी और फिर तत्काल रिहाई ने ऐसे ही कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर अब गहन मंथन ज़रूरी है।
पटना में विशेष कार्य बल (STF) ने मोतिहारी के एक कुख्यात अपराधी देवा गुप्ता को गिरफ्तार तो किया, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें रिहा भी करना पड़ा। इस नाटकीय घटनाक्रम ने पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देवा गुप्ता के वकीलों का दावा है कि उनकी गिरफ्तारी अवैध थी, क्योंकि पटना हाई कोर्ट ने पहले ही उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी थी। यह घटना आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वकीलों के अनुसार, उच्च न्यायालय ने देवा गुप्ता की गिरफ्तारी पर स्पष्ट रोक का आदेश दिया हुआ था, जिसकी जानकारी एसटीएफ को थी या नहीं, यह जांच का विषय है। ऐसी स्थिति में की गई गिरफ्तारी को सीधे तौर पर न्यायिक आदेश की अवहेलना माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अदालत का कोई आदेश पहले से मौजूद है, तो पुलिस को उस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था।
Patna News: STF की कार्रवाई पर गंभीर प्रश्नचिह्न
इस पूरी घटना ने STF की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। क्या एसटीएफ ने गिरफ्तारी से पहले सभी कानूनी पहलुओं की जांच नहीं की थी? या फिर यह एक ऐसी चूक थी जिसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं? यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बिहार में अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार लगातार सक्रियता दिखा रही है।
देवा गुप्ता जैसे कुख्यात अपराधियों के मामले में पुलिस की ऐसी गलतियाँ न सिर्फ उनकी विश्वसनीयता पर आंच लाती हैं, बल्कि समाज में भी गलत संदेश देती हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि कानूनी प्रक्रिया में हर कदम सावधानी से उठाना कितना आवश्यक है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस मामले में अगर उच्च न्यायालय के न्यायिक आदेश का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठना स्वाभाविक है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का मामला नहीं है, बल्कि यह कानून के राज और उसके पालन से जुड़ा एक अहम मुद्दा है।
आगे की राह: क्या होगा इस मामले का अंजाम?
अब देखना यह होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। क्या उच्च न्यायालय इस मामले का संज्ञान लेगा? क्या एसटीएफ अपनी गलती स्वीकार करेगी और भविष्य में ऐसी चूक से बचने के लिए कदम उठाएगी? ये सभी प्रश्न अब बिहार की जनता और कानूनी जानकारों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


