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फ़रवरी, 22, 2026
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बिहार सरकार में Economic Survey 2020-21 पेश, 6 वर्षों में 72.4% बढ़ी ऊर्जा की खपत, 51.0 लाख परिवारों को रोजगार, खुलीं बैंक की 270 शाखा

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र्थिक सर्वेक्षण 2020-21 पेश करते हुए डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री तार किशोर प्रसाद (Deputy CM cum Finance Minister Tar Kishore Prasad) ने कहा कि बिहार ने जिन क्षेत्रों में काफी प्रगति की है, उनमें से एक ऊर्जा क्षेत्र भी है।

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राज्य में ऊर्जा की प्रति व्यक्ति खपत 2014-15 के 203 किलोवाट आवर से बढ़कर 2020-21 में 350 किलोवॉट के आकार पर पहुंच गई है, जो छह वर्षों में 72.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।

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मांग की पूर्ति लगभग 109.5 प्रतिशत बढ़ी और 2014-15 के 2831 मेगावाट से 2020-21 में 5932 मेगावाट पहुंच गई। राज्य में बिजली की कुल खपत 2016-17 में 21.6 अरब यूनिट थी जो 2020-21 में बढ़कर 31.4 अरब यूनिट हो गई। इसका अर्थ चार वर्षों में 45 प्रतिशत से भी अधिक वृद्धि है।

वर्ष 2019-20 में राज्य में उपलब्ध विद्युत उत्पादन क्षमता 6073 मेगावाट थी जो 2020-21 5.7 प्रतिशत बढ़कर 6422 मेगावाट हो गई। बिजली की बढ़ी मांग पूरी करने के लिए राज्य सरकार की 2023-24 तक विभिन्न स्रोतों से चरणबद्ध ढंग से 6607 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की योजना है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण आबादी की विकास संबंधी जरूरतें पूरी करने के लिए अनेक कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करती है। जीविका उनमें से एक है जो ग्रामीण लोगों की जीविका संबंधी जरूरतों पर काम करती है। अभी 12.72 लाख से भी अधिक स्वयं सहायता समूहों का बैंकों के साथ ऋण-संपर्क है और अभी तक 16,537 करोड़ रुपये की लेनदेन की गई है।

वित्तीय समावेश योजना के तहत जीविका ने
11 लाख से भी अधिक स्वयं सेवा समूहों को कम खर्च में बीमा से आच्छादित किया गया है। ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने के लिहाज से रोजगार पैदा करने के लिए मनरेगा का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जा रहा है। रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या 2016-17 के 22.9 लाख से 132.2 प्रतिशत बढ़कर 2020-21 51.0 लाख हो गई।

डिप्टी सीएम ने कहा
कि गत सात वर्षों के दौरान बिहार में बाल विकास पर व्यय में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 से 2019-20 के बीच बच्चों पर समग्र व्यय 22.7 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा है। राज्य की शैक्षिक अधिसंरचना के अंदर कार्यशील पेयजल सुविधा और शौचालयों का सभी प्रकार के विद्यालयों में 90 प्रतिशत से अधिक आच्छादन रहा है।

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विभिन्न हस्तक्षेपों के जरिए 2020-21 में राज्य में 6 से 13 वर्ष उम्र के कुल 1.12 लाख विद्यालय से बाहर हो गए बच्चों (ओओओसी) को मुख्य धारा में लाया गया। इनमें से 0.54 लाख लड़कियां थीं और 0.58 लाख लड़के थे। ऐसा दिखता है कि विद्यालय से बाहर रहे बच्चों की संख्या 2019-20 में 1.44 लाख थी जो 2020-21 में घटकर 1.12 रह गई।

जन वितरण प्रणाली
जो अति गरीब परिवारों पर विशेष फोकस के साथ खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराती है। वर्ष 2020-21 में कुल 54,139.2 हजार टन खाद्यान्नों का आबंटन और 51,725.2 हजार टन का उठाव हुआ जो आबंटन का 95.6 प्रतिशत है।

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तार किशोर प्रसाद ने कहा कि
वर्ष 2011 की जनगणना में बिहार में शहरीकरण का स्तर पर 11.3 प्रतिशत था। लेकिन राज्य सरकार द्वारा शहरी केंद्र को पुनर्परिभाषित करने का निर्णय लेने के बाद राज्य शहरीकरण का वर्तमान स्तर । 15.3 प्रतिशत हो गया है जो सराहनीय विस्तार है। राज्य सरकार का नगर विकास पर 2015-16 में 1648 करोड़ थी, जो 2019-20 में 68 प्रतिशत बढ़कर 2019 20 में 2766 करोड़ रुपये हो गया।

उन्होंने कहा कि बैंकिंग अधिसंरचना राज्य में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बिहार में बैंकिंग क्षेत्र में मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का वर्चस्व है लेकिन हाल के वर्षों में निजी क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं की संख्या भी क्रमशः बढ़ रही है। वर्ष 2020-21 में राज्य में बैंकों की 270 नई शाखाएं शुरू हुई। सर्वाधिक 115 शाखाएं भारतीय स्टेट बैंक द्वारा खोली गई और उसके बाद 92 निजी क्षेत्र के बैंकों द्वारा। अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों की 52 शाखाएं खुली।

बिहार में ऋण जमा अनुपात 2019-20 के 36.1 प्रतिशत से बढ़कर 2020 21 में 41.2 प्रतिशत हो गया,जबकि संपूर्ण भारत के स्तर पर यह 76.5 प्रतिशत से घटकर 71.7 प्रतिशत रह गया। राज्य में वार्षिक ऋण योजना का लक्ष्य 2019-20 के 1,45,000 करोड़ रु. से 6.6 प्रतिशत बढ़कर 2020-21 में 1,54,500 करोड़ रु. हो गया। बैंकों ने बिहार में 2020-21 में 2.57 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जो गत वर्ष से 51.0 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2020-21 में जारी कुल नए कार्डों में से 2.24 लाख कार्ड अकेले व्यावसायिक बैंकों ने जारी किए। राज्य में सभी बैंकों की अनिप्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) मार्च 2020 में कुल अग्रिम का 14.9 प्रतिशत थीं जो मार्च 2021 में घटकर 11.8 प्रतिशत रह गई।

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उन्होंने कहा कि राज्य में मानव विकास के स्तर का जायजा लेकर राज्य सरकार के समग्र विकास मूलक प्रयासों के बारे में राय बनाई जा सकती है। राज्य सरकार के कुल व्यय में सामाजिक सेवाओं पर व्यय का हिस्सा 2015-16 में 34.4 प्रतिशत था जो 2020-21 में बढ़कर 44.0 प्रतिशत हो गया। यह 16.6 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है,जबकि देशभर के स्तर पर वृद्धि दर 13.8 प्रतिशत है। इस व्यय से लाभान्वित होने वाले दो मुख्य क्षेत्र स्वास्थ्य और शिक्षा हैं।

परिणामों पर गौर करने पर दिखता है कि बिहार में शिशु मृत्यु दर 29 मृत्यु प्रति 1,000 जीविका प्रसव है जो 30 के राष्ट्रीय आंकड़े से कम है। दिसंबर-2021 तक राज्य में 10 करोड़ से भी अधिक व्यक्तियों को टीके लगाए गए। पर्यावरण की स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक कार्यक्रम चलाए गए हैं। जल-जीवन-हरियाली मिशन के तहत 2020-21 में लगभग 3.92 करोड़ पौधे लगाए गए और करीब 4,436 हेक्टेयर वन क्षेत्र का मृदा और नमी संरक्षण कार्य के तहत उपचार किया गया। वर्ष 2020-21 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का कुल व्यय 694 करोड़ रुपये रहा।

 

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