



Bihar IPS Controversy: राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की जंग में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं, जब कुछ अधिकारी अपनी मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखा लांघ जाते हैं। एक ऐसे ही मामले में, पूर्व आईपीएस अमिताभ दास एक बार फिर विवादों के भंवर में फंस गए हैं, जहाँ उनके पुराने और नए कारनामे सुर्खियां बटोर रहे हैं।
Bihar IPS Controversy: पूर्व IPS अमिताभ दास पर फिर गहराया विवादों का साया, जानें पूरा मामला
Bihar IPS Controversy: पूर्व आईपीएस अमिताभ दास, जिन्हें बिहार सरकार ने जबरन रिटायर कर दिया था, अपनी अमर्यादित टिप्पणियों और लगातार सरकार विरोधी बयानों के कारण एक बार फिर विवादों में हैं। उनकी मुखरता और तीखी बयानबाजी अब उन्हें कानूनी पचड़ों में फंसाती दिख रही है।
दास पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं, जिनमें यौन शोषण और एक विदेशी महिला से छेड़छाड़ जैसे संवेदनशील मामले शामिल हैं। ये आरोप उनके सेवाकाल के दौरान सामने आए थे और इनकी वजह से उनकी छवि को खासा नुकसान पहुंचा था। अब सेवानिवृत्ति के बाद भी उन पर लगे नए आरोप मामले को और गंभीर बना रहे हैं।
Bihar IPS Controversy: अमिताभ दास के पुराने आरोपों की फाइल फिर खुली
सूत्रों के अनुसार, अमिताभ दास पर रिटायरमेंट के बाद भी सरकारी प्रतीक चिन्ह का अवैध उपयोग करने का आरोप है। इस गंभीर उल्लंघन पर अब उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। किसी भी सरकारी पद से हटने के बाद आधिकारिक चिन्हों का उपयोग करना नियमों के खिलाफ माना जाता है और यह दंडनीय अपराध है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
दास के करीबी लोग भी उनकी लगातार विवादास्पद टिप्पणियों से हैरान हैं। वे अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी लगातार सरकार और प्रशासन के खिलाफ मुखर रहे हैं, जिससे उन्हें कई बार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। उनकी यह कार्यप्रणाली अक्सर उन्हें सुर्खियों में ले आती है।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
सेवानिवृत्ति के बाद भी सरकारी नियमों का उल्लंघन
यदि यह बात सिद्ध होती है कि दास अभी भी आईपीएस का लेटर पैड या अन्य सरकारी प्रतीक चिन्हों का उपयोग कर रहे हैं, तो यह कानूनी रूप से गलत है और उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। सरकारी प्रतीक चिन्ह का अवैध उपयोग किसी भी पूर्व अधिकारी के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह पूरा मामला एक बार फिर से अधिकारियों द्वारा पद की गरिमा बनाए रखने और सेवानिवृत्ति के बाद भी नियमों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर देता है। इस विवाद ने बिहार के प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




