



पटना में बिजली बिल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, जो सरकार की ‘समानता’ वाली घोषणाओं पर सवाल खड़े कर रही है। एक तरफ जहां राज्य सरकार स्मार्ट मीटर धारकों को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का ऐलान कर रही है, वहीं दूसरी ओर एक पूर्व मंत्री के निजी आवास का लाखों का बकाया बिल होने के बावजूद कनेक्शन अब तक गुल नहीं हुआ है। आखिर क्या है यह पूरा मामला, जिसने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है?
बिहार में अब बिजली की प्रीपेड व्यवस्था लागू हो चुकी है, जिसके तहत स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि जिन उपभोक्ताओं के पास स्मार्ट प्रीपेड मीटर हैं, उन्हें हर महीने 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिलेगी। इसके साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर धारकों को रिचार्ज न करने की स्थिति में भी तुरंत बिजली कटौती का सामना नहीं करना पड़ेगा, जैसा कि पहले होता था। यह कदम राज्य के लाखों उपभोक्ताओं को राहत देने और बिजली चोरी रोकने की दिशा में उठाया गया है।
नीतिगत व्यवस्था पर सवाल
यह नई व्यवस्था जहां आम जनता के लिए सुविधा लेकर आई है, वहीं कुछ ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं, जो इन नियमों के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। दरअसल, बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव का निजी आवास, जो बेउर स्थित है, अभी भी पोस्ट-पेड बिलिंग सिस्टम पर ही चल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस घर पर बिजली विभाग का भारी भरकम बकाया है, लेकिन इसके बावजूद बिजली आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है। यह स्थिति सरकार की घोषित नीतियों और सभी के लिए समान व्यवस्था के दावों को सवालों के घेरे में ला रही है।
लाखों का बकाया, फिर भी कनेक्शन बरकरार
बिहार ऊर्जा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, तेज प्रताप यादव के बेउर स्थित आवास (कंज्यूमर अकाउंट नंबर 101232456) का आखिरी बिजली बिल जुलाई 2022 में जमा किया गया था। उस समय 1,04,799 रुपये का भुगतान किया गया था। इसके बाद नवंबर 2025 तक इस कनेक्शन पर कोई बिल जमा नहीं हुआ है। विभाग के मुताबिक, इस आवास पर कुल 3,56,135 रुपये का बकाया है। यह बकाया राशि विभिन्न मदों में विभाजित है:
- ऊर्जा शुल्क: ₹2,30,160.54
- विलंब शुल्क: ₹23,681.59
- अन्य शुल्क: ₹71,142.15
- नवंबर 2025 का बिल: यह जोड़ने पर कुल बकाया ₹3,56,135 तक पहुँच गया है।
नियमों की अनदेखी या वीआईपी ट्रीटमेंट?
बिजली विभाग के अपने नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि यदि किसी उपभोक्ता पर 25 हजार रुपये से अधिक का बकाया हो जाता है, तो उसका कनेक्शन तुरंत काट दिया जाना चाहिए। लेकिन, पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के मामले में इस नियम का खुले तौर पर उल्लंघन किया जा रहा है। लाखों रुपये का बकाया होने और निर्धारित समय-सीमा के बाद भी कनेक्शन न काटना, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह पैदा करता है। यह आम उपभोक्ताओं के बीच यह संदेश दे सकता है कि नियमों का पालन केवल उनके लिए है, जबकि प्रभावशाली व्यक्तियों के लिए अलग मापदंड अपनाए जाते हैं। यह स्थिति न केवल सरकार की छवि को धूमिल करती है, बल्कि उसकी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठाती है।

