Ganga Vilas Cruise: गंगा में लहरों पर तैरता भारत का सांस्कृतिक वैभव, जिसका सपना था देश-विदेश के सैलानियों को भारत के हृदय से रूबरू कराना, इस बार प्रकृति की चुनौती के आगे ठहर गया। जीवनदायिनी गंगा के कम होते जलस्तर ने क्रूज की यात्रा को बीच में ही विराम दे दिया, जिसके चलते विदेशी पर्यटकों को सड़क मार्ग से अपनी आगे की यात्रा पूरी करनी पड़ी।
गंगा विलास क्रूज: कम जलस्तर ने रोकी रफ्तार, पटना से लौटा, 30 विदेशी पर्यटक सड़क मार्ग से वाराणसी पहुंचे।
कोलकाता से वाराणसी के लिए रवाना हुआ प्रतिष्ठित गंगा विलास क्रूज पटना से ही वापस लौट आया है। पटना और वाराणसी के बीच गंगा नदी में विभिन्न स्थानों पर जलस्तर अत्यधिक कम होने के कारण क्रूज का आगे संचालन असंभव हो गया था। इस अप्रत्याशित बाधा के चलते क्रूज में सवार 30 विदेशी पर्यटकों को सड़क मार्ग से वाराणसी लाया गया। 12 नवंबर को कोलकाता से अपनी यात्रा शुरू करने वाले इस क्रूज में जर्मनी, स्विट्जरलैंड और अमेरिका के पर्यटक शामिल थे। इस यात्रा के दौरान कुल 15 पड़ाव स्थलों की योजना बनाई गई थी।
यह आलीशान रिवर क्रूज पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, मायापुर, मटियारी और फरक्का, झारखंड के साहिबगंज और बिहार के सेमरिया तथा मुंगेर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों से होकर पिछले महीने पटना पहुँचा था। इन ठहराव स्थलों पर पर्यटकों को भारत की समृद्ध धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और विशिष्ट स्थानों का भ्रमण करने का अवसर मिला। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
गंगा विलास क्रूज की तीसरी यात्रा और उसकी अनूठी खूबियाँ।
पटना से वाराणसी की ओर बढ़ने पर गंगा के कम होते जलस्तर ने क्रूज को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके परिणामस्वरूप, सभी पर्यटकों को सड़क मार्ग से वाराणसी ले जाया गया। वाराणसी पहुँचकर पर्यटक काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करेंगे, सारनाथ और अन्य प्रमुख स्थलों का भ्रमण करेंगे, तथा दशाश्वमेध घाट की प्रसिद्ध गंगा आरती का भी अनुभव करेंगे। इन पर्यटकों में से 25 अपनी यात्रा पूरी कर वापस लौट जाएंगे, जबकि पांच पर्यटक वाराणसी में कुछ दिन और रुकेंगे।
हेरिटेज रिवर जर्नी (अंतरा) के निदेशक राज सिंह ने बताया कि जलयान को दो दिन पहले ही पटना से वापस कर दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पटना से बक्सर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली और वाराणसी के बीच सात अलग-अलग स्थानों पर जलस्तर क्रूज संचालन के अनुकूल नहीं था, जिसने आगे की यात्रा में बाधा उत्पन्न की। रिवर क्रूज इंडिया के परिदृश्य में यह एक महत्वपूर्ण घटना है जो जलमार्गों के प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर करती है।
गंगा नदी में सबसे लंबी दूरी तय करने वाले गंगा विलास जलयान का उद्घाटन 13 जनवरी 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविदास घाट पर एक वर्चुअल समारोह के माध्यम से किया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि गंगा विलास जलयान ने वर्ष 2024 में भी वाराणसी से होकर यात्रा की थी। यह इस जलयान की काशी से होकर गुजरने वाली तीसरी यात्रा थी।
सुविधाएं जो बनाती हैं इसे खास।
गंगा विलास जलयान में 18 शानदार सुइट्स हैं, जो यात्रियों को पंचतारा होटलों जैसी सुविधाएं प्रदान करते हैं। इस जलयान ने अपनी पहली यात्रा में कोलकाता से डिब्रूगढ़ (असम) तक 3200 किलोमीटर की दूरी तय की थी। इस दौरान यह जलयान पांच भारतीय राज्यों और बांग्लादेश की 27 नदियों से होकर गुजरा था। यह अधिकतम 20 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से यात्रा कर सकता है। सामान्य जलयानों में व्हील हाउस पहली मंजिल पर होता है, लेकिन गंगा विलास में यह दूसरी मंजिल पर बना है, जो इसकी एक अनूठी विशेषता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कई वर्षों से गंगा में ड्रेजिंग का टेंडर लंबित था, जिसके पूरा होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन वास्तविक कार्य कहाँ हो रहा है, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की ओर से भी इस संबंध में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। यह स्थिति जलमार्गों के कुशल संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी को दर्शाती है, विशेषकर जब हम अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिवर क्रूज सेवाओं की बात करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





